फर्जी हस्ताक्षरों से मुख्यमंत्री को शिकायत! कतरास थाना व ASI को बदनाम करने की साजिश उजागर

👉कतरास पुलिस पर झूठे आरोपों की परतें खुलीं, शिकायत पत्र में फर्जीवाड़े के संकेत
👉अवैध कारोबार पर कार्रवाई से बौखलाए असामाजिक तत्व, पुलिस को फंसाने की कोशिश
👉मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की सच्चाई संदिग्ध, दुकानदारों ने हस्ताक्षर से किया इनकार
👉कतरास थाना के खिलाफ शिकायत में फर्जी दस्तखत का मामला, जांच की आंच तेज
कतरास।
कतरास थाना की पुलिस और वहां पदस्थ एक ASI एस के चौबे के खिलाफ मुख्यमंत्री को भेजे गए कथित शिकायत पत्र की सच्चाई अब संदेह के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि शिकायत पत्र में जिन दुकानदारों के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, वे फर्जी हैं और संबंधित व्यापारियों ने किसी भी प्रकार की शिकायत या हस्ताक्षर करने से साफ इनकार किया है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि न तो उन्होंने पुलिस के खिलाफ कोई आवेदन दिया है और न ही किसी शिकायत पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर जानबूझकर कतरास थाना और वहां पदस्थ पुलिसकर्मियों की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में कतरास थाना पुलिस द्वारा अवैध कारोबार, अपराध और असामाजिक गतिविधियों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी कार्रवाई से असंतुष्ट कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिस पर दबाव बनाने के उद्देश्य से झूठे और मनगढ़ंत आरोप गढ़े गए हैं।
शिकायत पत्र में यह दावा किया गया है कि पुलिस शाम 7 से 8 बजे के बीच जबरन बाजार बंद करवा देती है, जबकि स्थानीय स्तर पर जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अधिकांश दुकानें साढ़े नौ से दस बजे के बीच बंद होती हैं, जिसका प्रमाण क्षेत्र में लगे सीसीटीवी फुटेज से भी उपलब्ध बताया जा रहा है।
इसी प्रकार, खेतान टावर स्थित ज्वेलरी दुकान में हुई डकैती के मामले को लेकर भी शिकायत पत्र में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जबकि हकीकत यह है कि कतरास थाना प्रभारी असित कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने घटना के तुरंत बाद सफल उद्भेदन करते हुए लूटे गए सामान की बरामदगी, आरोपियों की गिरफ्तारी और रिमांड की कार्रवाई पूरी की थी। इस पूरे मामले की जानकारी धनबाद एसएसपी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सार्वजनिक की जा चुकी है।
शिकायत पत्र में न तो किसी आरोप का ठोस प्रमाण संलग्न है और न ही किसी स्पष्ट घटना का विवरण। उल्टे, अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह मामला फर्जी हस्ताक्षर और प्रशासन को गुमराह करने की साजिश का प्रतीत हो रहा है, जो स्वयं एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।
कतरास थाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है और आगे भी अपराध व अपराधियों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। साथ ही पुलिस ने मीडिया से अपील की है कि बिना पुष्टि के भ्रामक सूचनाओं को प्रसारित न किया जाए, ताकि पुलिस और मीडिया दोनों की विश्वसनीयता बनी रहे।
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासनिक जांच की निगाहें टिकी हैं। सूत्रों का कहना है कि कतरास थाना को बदनाम करने की यह साजिश अधिक दिन तक टिकने वाली नहीं है और दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
वहीं स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने कतरास पुलिस के समर्थन में सामने आते हुए कहा है कि पुलिस ईमानदारी से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी है और कुछ लोगों द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
Subscribe to my channel