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नया साल, नया DGP! झारखंड में आज खत्म होगा सस्पेंस, तीन IPS अफसर रेस में सबसे आगे

👉झारखंड को मिलेगा नया DGP, तीन सीनियर IPS अफसरों के बीच मुकाबला तेज

👉31 दिसंबर को रिटायर होंगी तदाशा मिश्रा, नये साल में झारखंड को नया पुलिस मुखिया तय

👉नई नियमावली से होगा DGP का चयन, UPSC की भूमिका सीमित है।

झारखंड में नये पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चला आ रहा संशय नये साल के पहले ही दिन खत्म होने की पूरी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा प्रभारी DGP तदाशा मिश्रा को सेवा विस्तार देने से जुड़ी कोई फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि राज्य को 1 जनवरी को नया DGP मिल सकता है।

अब तक DGP चयन के लिए IPS अधिकारियों का पैनल UPSC को नहीं भेजा गया है। इसका अर्थ है कि राज्य सरकार फरवरी 2025 में अधिसूचित ‘DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली–2024’ के तहत ही नयी नियुक्ति करने जा रही है।

👉DGP की दौड़ में ये तीन IPS अफसर सबसे आगे

सूत्रों के अनुसार, DGP पद के लिए तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं—

अनिल पालटा (IPS, 1990 बैच)

प्रशांत सिंह (IPS, 1992 बैच)

मनविंदर सिंह भाटिया (IPS, 1992 बैच)

मनविंदर सिंह भाटिया वर्तमान में होमगार्ड एंड फायर सर्विस के डीजी के पद पर तैनात हैं।

👉31 दिसंबर को रिटायर होंगी तदाशा मिश्रा

पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद 6 नवंबर को महिला IPS अधिकारी तदाशा मिश्रा को प्रभारी DGP बनाया गया था। उस समय वे गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव थीं। बाद में उन्हें डीजी रैंक में प्रोन्नति दी गई, लेकिन 31 दिसंबर 2025 को वे सेवानिवृत्त हो रही हैं।

👉क्या है नई ‘DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली–2024’

झारखंड कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इस नियमावली के तहत—

6 सदस्यीय नाम निर्देशन समिति का गठन होगा

समिति के अध्यक्ष होंगे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश

सदस्य के रूप में:

मुख्य सचिव

UPSC नामित सदस्य

JPSC अध्यक्ष/नामित सदस्य

एक सेवानिवृत्त DGP

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव

समिति 3 से 5 नामों का पैनल तैयार करेगी (विशेष परिस्थिति में 3 से कम नाम भी संभव)।

चयन के प्रमुख मापदंड होंगे—

सेवा रिकॉर्ड

प्रशंसा पत्र, पुरस्कार व मेडल

नेतृत्व क्षमता

पुलिस बल को कमांड करने का अनुभव

अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा विवरण

नियुक्त DGP का न्यूनतम कार्यकाल 2 वर्ष

👉पुरानी प्रक्रिया से क्या बदला?

पहले राज्य सरकार UPSC को नाम भेजती थी, UPSC तीन नाम लौटाता था और उन्हीं में से DGP चुना जाता था।

अब चयन प्रक्रिया में राज्य की निर्णायक भूमिका बढ़ गई है।

Dhanbad Jharkhand News @ Bureau Chief Mithilesh pandey

Indian Crime News

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