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किसान ने कलेक्टर से कहा… मुझ जिंदा को बता दिया मृत, कहें तो यहीं मर कर दिखाऊं

समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों की फजीहतें जिले में कम होने का नाम नहीं ले रहीं। एक ओर जहां केंद्र में अधिक वजन लेने, समय पर तौल न होने, स्लॉट समय पर बुक न होने की समस्या है तो वहीं अब यह बात सामने आने लगी है कि जिंदा किसानों को मृत बता दिया गया है। ऐसा ही मामला सोमवार को सामने आया। एक जिंदा किसान को धान के पंजीयन में मृत बता दिया गया है। दुखी किसान कलेक्टर आशीष तिवारी के पास पहुंचा और रुंधे हुए गले से पीड़ा बयां की।
रामभरण विश्वकर्मा निवासी गुरजीकला तहसील रीठी ने लगभग 250 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन कराया था। लेकिन किसान को पंजीयन में मृत बता दिया गया है। किसान को मैसेज पहुंचा है कि ‘किसान पंजीयन क्रमांक 222420009077 की समग्री आइडी मृत किसान की श्रेणी में पाई गई है, खाद्य विभाग के निर्देशानुसार कृपया अपनी समग्र आइडी के लिए सत्यापन के लिए संबंधित तहसीलदार से संपर्क करें’। दस्तावेजों में मृत घोषित करने से किसान हैरान व परेशान हैं।

15 दिन से हूं परेशान…
कलेक्टर आशीष तिवारी से किसान रामभरण ने कहा कि मेरा स्वयं का पंजीयन है, स्लॉट बुक नहीं हो रहा, मैं 15 दिन से परेशान हूं, कहें तो यहीं पर मर कर दिखाऊं। जब किसान ने यह बात कही तो कलेक्टर ने आवेदन डिप्टी कलेक्टर प्रदीप मिश्रा को देते हुए कहा कि जांच करें लें और कार्यालय के अंदर चले गए। वहीं कलेक्टर ने कहा कि समग्र आइडी में जिस जीआरएस ने गड़बड़ी की है उसपर कार्रवाई करें। किसानों ने डिप्टी कलेक्टर से कहा कि जो रजिस्ट्रेशन सिकमीनामा के असत्यापित किए गए हैं, उनमें सुधार के लिए समय दें। किस कारण असत्यापित कर रहे हैं उसका कारण भी अधिकारी किसान को बताएं, जो गलत है उसको सजा दें, लेकिन वाजिब किसानों को परेशान न किया जाए।
सिकमी किसानों के पंजीयन असत्यापित
सिकमी में जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके पंजीयन को असत्यापित कर दिया गया है। जिले के सैकड़ों किसान धान के बेचने के लिए परेशान हैं। उनके स्लॉट ही बुक नहीं हो रहे। वे केंद्र प्रभारी, नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एसडीएम, खाद्य विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं पर भी समाधान नहीं हो रहा। इसकी मुख्य वजह यह है कि पंजीयन में फर्जीवाड़े की आशंका को लेकर रोक सिकमी बटाईदार किसानों के धान विक्रय पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अबतक समाधान नहीं निकाला गया।


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