झारखंड में जनगणना-2027 की काउंटडाउन शुरू, 15 महीनों तक प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक

👉 CM हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला: जनगणना 2027 को ध्यान में रखते हुए जिलों–प्रखंडों की सीमाएं फ्रीज़
👉 जनगणना 2027 की तैयारियाँ तेज, झारखंड में 1 जनवरी 2026 से सीमा परिवर्तन पर पूर्ण प्रतिबंध
👉 डिजिटल जनगणना से पहले झारखंड सरकार सख़्त, सभी विभागों को सीमा बदलाव की रिपोर्ट अनिवार्य
झारखंड सरकार ने देश की अगली डिजिटल जनगणना 2027 के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संबंध में एक अहम फैसला लेते हुए पूरे राज्य में जिला, प्रखंड, नगर निकाय से लेकर ग्राम पंचायत तक किसी भी प्रशासनिक सीमा में बदलाव पर सख्त रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा।
सरकार ने यह आदेश जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के तहत अधिकारों का उपयोग करते हुए जारी किया है। सीएम ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि 31 दिसंबर 2025 तक अगर किसी भी स्तर पर सीमा परिवर्तन हुआ है, तो उसकी अधिसूचना और पूरा विवरण तुरंत जनगणना निदेशालय, रांची को भेजना अनिवार्य है।
👉डिजिटल फॉर्मेट में होगी अगली जनगणना
केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि देश की जनगणना 2027 में आयोजित की जाएगी।
👉संदर्भ तिथि (Reference Date) – 1 मार्च 2027
👉ठंड व बर्फबारी वाले राज्यों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड) – 1 अक्टूबर 2026
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। नागरिकों को मोबाइल ऐप के जरिये Self Enumeration यानी स्वयं अपनी जानकारी भरने की सुविधा भी मिलेगी। डेटा सुरक्षा के लिए अत्यधिक कठोर प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे।
👉पहली बार शामिल होगा जातिगत डेटा
इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार जातिगत आंकड़े (Caste-Based Data) भी दर्ज किए जाएंगे।
👉करीब 34 लाख गणनाकर्मी व पर्यवेक्षक
👉1.3 लाख सरकारी कर्मचारी
इस विशाल प्रक्रिया में शामिल होंगे।
👉जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी—
👉1. हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग डेटा संग्रह
घरों की स्थिति
सुविधाएं
संपत्ति विवरण
👉2. जनसंख्या गणना
हर व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, जातिगत और अन्य जानकारियाँ एकत्र की जाएंगी।

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