आपत्ति प्रस्तुत, पत्रकार वार्ता कर जताया आक्रोश

मेसर्स गोदावरी पावर एण्ड इस्पात लिमिटेड रायपुर द्वारा आरीडोंगरी आइरन ओर (लोह अयस्क) परियोजना के माइनिंग पट्टा, क्षेत्र के विस्तार के लिए ग्राम कच्छी, तहसील- भानुप्रतापपुर, जिला उत्तर बस्तर कांकेर के टोपो शीट क्रमांक 64 एच/2 64 एच 3 64डी/15 के रकबा 32-36 हेक्टर के लिए पर्यावरण मंजूरी हेतु की जा रही जन सुनवाई दिनांक 13.11.2025 में आपत्ति प्रस्तुत करने के संबंध में। उपरोक्त विषयांकित कच्छी आरक्षित वन के मध्य प्रस्तावित खनन परियोजना पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र में निवासरत आदिवासी, वन्य जीवों, पशु पक्षियों आरक्षित वन क्षेत्र के लिए अत्यन्त ही हानिकारक है। प्रस्तावित परियोजना का क्षेत्र भारतीय संविधान को पांचवी अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित क्षेत्र है तथा उक्त अधिसूचित क्षेत्र में स्थापित किया जाने वाले किसी संयत्र / खनन परियोजना को किसी निजी कम्पनी अथवा व्यक्ति को व्यवसाय के लिए भूमि दिये जाने के पूर्व उस क्षेत्र के निवासियों के अभिमत के बिना दिया जाना निषिद्ध है गुपचूप तरीके से किसी ग्राम पंचायत संस्था को प्रभावित कर पूर्व में किसी प्रकार अनापत्ति प्राप्त कर ली गई है तो उसे अमान्य करते हुए वर्तमान में जनप्रतिनिधियों / पंचायत पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय जनता द्वारा इस जनसुनवाई में की जा रही आपत्ति को ही प्रमुख अभिमत माना जावें। इस क्षेत्र में लगभग 65% अनुसूचित जनजाति एवं शेष अनुसूचित जाति / पिछडावर्ग एवं सामान्य श्रेणी के निवासीगण है जिसके सबका उद्देश्य इस क्षेत्र के जंगल एवं जमीन को सुरक्षित करना है।
इसलिए दिनांक 13.11.2025 को प्रस्तावित परियोजना पर आपत्ति करते हुए निरस्त किये जाने की मांग निम्नानुसार आधारो पर करते हैः-01. यह कि मेसर्स गोदावरी पावर एण्ड इस्पात लिमिटेड, रायपुर को उत्तर बस्तर कांकेर जिले के ग्राम आरी डोंगरी में 106.60 हेक्टेयर के आरक्षित वन क्षेत्र पर लौह अयस्क (IRON ORE) का खनि पट्टा केन्द्रीय शासन के अनुमोदन से राज्य शासन द्वारा स्वीकृत किया गया है। तत्कालीन समय में उक्त कम्पनी द्वारा प्रस्तुत किये गये पर्यावरण प्रस्ताव में दिये गये पर्यावरण योजना में आसपास के क्षेत्र के बुनियादी सामुदायिक विकास के लिए दिये गये आश्वासन पूर्णतः झूठे साबित हुए हैं। उक्त कम्पनी द्वारा राज्य शासन एवं पर्यावरण विभाग को दिये गये लिखित आश्वासन का खुलमखुला घोर उल्लंघन किया गया है। हजारों की संख्या में इमारती, फलदार वृक्ष एवं अन्य उपयोगी वृक्षों की अन्धाधुन्ध कटाई की गई है तथा दिये गये लिखित आश्वासन के विकल्प में वृक्षारोपण की बाध्यता होने के बावजूद कोई वृक्ष नहीं लगाया है। कम्पनी द्वारा किये गये शर्तों के उल्लंधन में वन एवं पर्यावरण विभाग एवं राज्य शासन के खनिज विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है। परियोजना स्थल से खनिज परिवहन के लिए बनाए गये सड़क मार्ग के दोनों ओर वृक्षारोपण कर ग्रीन कारीडोर बनाये जाने के निर्देशों का भी उल्लंघन किया है जिससे बड़े बड़े हाइवा / डम्पर चलने से पूरा क्षेत्र धूल/डस्ट से प्रदूषित हो गया है। सड़क मार्ग कभी भी पानी का छिडकाव नहीं किया जाता है।
कम्पनी द्वारा परियोजना क्षेत्र के आसपास के ग्रामों में सामूदायिक विकास के कार्य किये जाने के लिखित आश्वासन के बावजूद कोई विकास कार्य नहीं किया। कम्पनी द्वारा परियोजना क्षेत्र में मशीन द्वारा ड्रीलिंग एवं हैवी ब्लास्टिंग की तेज ध्वनि से पूरा वातावरण अशांत हो गया है एवं पूरे क्षेत्र में हवा प्रदूषित हो जाती है। तेज ध्वनि से आरक्षित वन के वन्य जीवों / पशुपक्षी स्थान छोड़कर अन्य क्षेत्र में निर्वासित जीवन जी रहे है। कम्पनी द्वारा खनिज उत्खनन की आड़ में आरक्षित वन के वृक्षों की अवैध कटाई जारी है। उपरोक्त कारणों से कम्पनी को लौह खनिज के लिए दी गई पर्यावरण मंजूरी एवं खनि पट्टा तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जावे। ग्राम कच्छी, तहसील भानुप्रतापपुर व जिला कांकेर के टोपो शीट क्रमांक 64 एच/2, 64/एच/3 एवं 64 डी/15 रकबा 32.36 हेक्टर क्षेत्र पर प्रस्तावित पर्यावरण स्वीकृति के लिए जन सुनवाई में आपत्ति, मेसर्स गोदवारी पावर एवं इस्पात लिमिटेड रायपुर द्वारा पूर्व में स्वीकृत आरी डॉगरी माइन्स के विस्तार के लिए ग्राम कच्छी के 32-36 हेक्टर क्षेत्र पर स्वीकृत खनि पट्टा के लिए पर्यावरण स्वीकृति मांगी गई है जिसकी जन सुनवाई दिनांक 13.11.2025 को निश्चित की गई है जिस पर मैं निम्नानुसार आपत्ति करता हूं:-
1- कम्पनी द्वारा ग्राम कच्छी का आवेदित एवं पर्यावरण प्रस्तावित क्षेत्र चारों तरफ वन से आरक्षित है। पर्यावरण प्रस्ताव के पूर्व ही उक्त क्षेत्र से कम्पनी द्वारा लगभग 5000 वृक्षों की की अवैध कटाई की जा चुकी है विकल्प में एक भी वृक्ष नहीं लगाया गया है। प्रस्तावित परियोजना का खनन क्षेत्र कच्छी आरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है जो कम्पनी के परियोजना प्रस्ताव में भी अभिलिखित है। इस प्रकार आरक्षित वन क्षेत्र के मध्य में कोई भी खनन परियोजना स्वीकृत किया जाना वन क्षेत्र के वन्य जीव, पेड़ पौधे, जलाशय एवं अन्य प्राकृमिक साधन नष्ट होने की पूर्ण सम्भावना होने से प्रस्तावित परियोजना निरस्त किये जाने योग्य है।
2- कम्पनी द्वारा प्रस्तावित परियोजना सारणी में राजोबिदिह आरक्षित वन, खाण्डे सुरक्षित वन, नधु आरक्षित वन, पिचेकट्टा आरक्षित वन, मारडेल सुरक्षित वन, रनवाही सुरक्षित वन, उनोचपनी आरक्षित वन, मगरधा आरक्षित वन, लिमोडीह सुरक्षित वन ये सभी आरक्षित वन प्रस्तावित परियोजना के चारों ओर से आच्छादित है और कच्छी वन आरक्षित क्षेत्र से जुड़ा है कम्पनी द्वारा प्रस्तावित परियोजना में जो दूरी बताई गई है वह वास्तविक दूरी नहीं है। सभी आच्छादित वन की दूरी आरक्षित वन सीमा क्षेत्र से बहुत ही कम दूरी पर स्थित है इस प्रकार कम्पनी द्वारा प्रस्तावित परियोजना में झूठा कथन का पर्यावरण विभाग को गुमराह किया है। उक्त कारण से प्रस्तावित परियोजना निरस्त किये जाने योग्य है।
3- यह कि कम्पनी द्वारा प्रस्तावित परियोजना में खनन की प्रक्रिया में मशीनों द्वारा ड्रीलिंग एवं ब्लास्टिंग करने का लेख किया है। मशीनों की ड्रीलिंग एवं हैवी ब्लास्टिंग से वन क्षेत्र में विचरित वन्य जीवों, पशु पक्षियों पर तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण होगा। वन्य प्राणी एवं पशु पक्षी आतंकित होकर वन क्षेत्र छोडकर अन्यत्र भागेंगे जिससे सम्पूर्ण वन क्षेत्र में अशांत वातावरण व्याप्त होगा। हैवी ब्लास्टिंग एवं डस्ट से वन क्षेत्र के पेड एवं पौधों को भारी नुकसान होगा। परियोजना प्रस्ताव के अनुसार उपलब्ध खनिज की मात्रा 1145 मिलियन टन है जो सीमित मात्रा में केवल 8 वर्ष के लिए है खनिज का कोई बड़ा भण्डार नहीं है जिसके लिए चारों ओर से आच्छादित पूरे आरक्षित वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने की तैयारी कर ली गई है। कम्पनी की परियोजना लागत केवल 8.76 करोड़ है जिसके लिए पूरे आरक्षित वन क्षेत्र विस्तारकर खनन करने के लिए दिया जाना उचित नहीं है।
वायु पर प्रभाव खनन कार्य के लिए ड्रीलिंग एवं ब्लास्टिंग का उपयोग किये जाने से प्रदूषित वायु एवं हा तेज ध्वनि का संचार होगा जो इस शांति प्रिय वन क्षेत्र नुकसान देह है। ध्वनि का प्रभाव परियोजना क्षेत्र आरक्षित वर्ग के मध्य है जिसके खनिज परिवहन के ट्रकों द्वारा आवागमन से पूरे वन क्षेत्र में ध्वनि का विस्तार होने से वन्य जीवों पर कुप्रभाव पड़ेगा। जल पर्यावरण पर प्रभाव खदान की खुदाई से जमीन के निचले स्तर से पानी खदान आने से दूषित होगा जिसकी निकासी से जल स्तर पर विपरित प्रभाव पड़ेगा। भूमि पर्यावरण पर प्रभाव खनिज के उत्खनन से सतह से नीचे गहरा होन से खदान बंद होने पश्चात वन्य जीवों के लिए खतरनाक गड्डे साबित होगे। वन्य जीवों का जान का खतरा है।
परियोजना के लाभ परियोजना से केवल कम्पनी को लाभ होगा। स्थानीय निवासी को कम्पनी रोजगार नहीं देते न ही आसपास पड़ोस के गांव में बुनियादी संरचना विकसित करने में कोई सहयोग कम्पनी द्वारा नहीं किया जाता। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कम्पनी को आरी डोंगरी में दी गई लौह अयस्क में खदान 106. 60 हेक्टेयर में कार्यरत परियोजना से पुष्टि की जा सकती है।कम्पनी द्वारा परियोजना क्षेत्र में वृक्षारोपण किये जाने का जो आश्वासन दिया है वह पूर्णतः झूठ पर आधारित है। परियोजना के पूर्व ही लगभग 5000 वृक्ष की कटा दिये गये है। ऐसी स्थिति में कम्पनी द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावित पर्यावरण स्वीकृति की मंगा पर्यावरणीय एवं भौगौलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निरस्त करने की कृपा करें। इस प्रकार हम क्षेत्रवासी उक्त परियोजना प्रस्ताव का विरोध करते हुए उपरोक्त कारणों से जनसुनवाई में आपत्ति दर्ज करते हुए उक्त परियोजना के लिए प्रस्तुत पर्यावरण प्रस्ताव को निरस्त किये आने की अपेक्षा करते हैं।
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