खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स 2025 की मेजबानी करेगा छत्तीसगढ़

भारत सरकार युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के खेलो इंडिया योजना अंतर्गत भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), नई दिल्ली ने प्रथम बार “खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स (Khelo India Tribal Games–KITG) 2025” आयोजन की मेजबानी का दायित्व राज्य को सौंपा है, जिसके अंतर्गत एथलेटिक्स, तीरंदाजी और मल्ल्खम्भ खेलो का आयोजन होगा. यह गरिमामय आयोजन जगदलपुर में आयोजित होने पर सहमति प्रदान की गई. यह आयोजन जनवरी 2026 में होगा, जिसमें देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 1200 आदिवासी खिलाड़ी भाग लेंगे। भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय की ‘खेलो इंडिया योजना’ के तहत यह नई पहल, आदिवासी युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देगी। यह आयोजन जनजातीय गौरव वर्ष (15 नवम्बर 2024 से 15 नवम्बर 2025) के अंतर्गत किया जा रहा है, ताकि खेलों के माध्यम से आदिवासी समुदायों की संस्कृति, परंपरा और सशक्तिकरण को राष्ट्रीय पहचान मिल सके। खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स में पारंपरिक व प्रतिस्पर्धात्मक खेल एथलेटिक्स, तीरंदाजी के साथ मलखंभ को प्रदर्शनात्मक रूप में शामिल किया गया है। आयोजन के लिए धरमपुरा खेल परिसर और इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम को प्रारंभिक चरण में स्वीकृति प्रदान की गई है।

भारतीय खेल प्राधिकरण की उच्च स्तरीय दल ने जगदलपुर पहुंचकर दोनों स्थलों का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण दल में संचालक (SAI) ममता ओझा, उपसंचालक (SAI) श्रीनिवास मालेकार, गोपाल कंदपाल आदित्य ब्रम्हे खेल एवं युवा कल्याण, संचालक तनुजा सलाम, संचालनालय से अधिकारी गिरीश शुक्ल, टी.एन. रेड्डी, तथा जगदलपुर से डी.एस. नेताम, वेद प्रकाश सोनी, सुनील पिल्ले, कोटेश्वर नायडू और प्रदीप साहू शामिल थे।निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर एवं सहायक संचालक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग ऋषिकेश तिवारी ने दल को स्थल की जानकारी दी और आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। राज्य खेल संचालक तनुजा सलाम ने कहा कि यह आयोजन राज्य के लिए गौरव की बात है और इसके सफल संचालन हेतु समस्त आगामी तैयारी समय पर करने के निर्देश दिए. राज्य शासन का मानना है कि इस आयोजन से बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ की आदिवासी खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्राप्त होगा तथा राज्य की संस्कृति और कला को वैश्विक पहचान मिलेगी। यह आयोजन राज्य की युवा शक्ति को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा और छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा। यह आयोजन न केवल खेल प्रतियोगिता भर रहेगा, बल्कि यह जनजातीय गौरव, एकता और संस्कृति का उत्सव बनकर देशभर में छत्तीसगढ़ की पहचान को और सशक्त करेगा।
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