Chhattisgarh New : छत्तीसगढ़ी भाषा पर आधारित दो फिल्मों को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है।
छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में दो ऐसी फिल्में बनी जिसको सेंसर सर्टिफिकेट नहीं दिया गया यह हमारे भारतीय संस्कृति एवं छत्तीसगढ़ की संस्कृति के साथ सेंसर बोर्ड के द्वारा अन्याय पूर्ण कार्यवाही किया गया है वह दो फिल्में है जो कि निम्न है।

ब्यूरो चीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ी भाषा पर आधारित फिल्म जानकी को नहीं दिया गया सेंसर बोर्ड द्वारा यह कहा गया कि जानकी फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट इसलिए नहीं दे सकता उनका जवाब यह था कि जानकी का टाइटल चेंज करो जानकी का करैक्टर चेंज करो इस तरह से न जाने कितने सारे प्रश्न सेंसर बोर्ड के द्वारा फिल्म जानकी को दिया गया फिल्म के निर्माता मोहित साहू को उपरोक्त प्रश्नावली के साथ दिया गया था मगर आज तारीख तक मोहित साहू का कहना यह था कि मेरी जो फिल्म है जानकी जिसका रजिस्ट्रेशन हुआ है रजिस्ट्रेशन के ही दौरान बोल देना था सेंसर सर्टिफिकेट नहीं दे पाएंगे आपको क्योंकि जानकी टाइटल से बहुत सारी फिल्में बन चुकी है यह उन्होंने हवाला दिया था मोहित साहू द्वारा इस पर किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया उन्होंने यह कहा की कैसे हम जानकी का टाइटल चेंज करेंगे कैसे हम जानकी का कैरेक्टर चेंज करेंगे यह हमसे नहीं हो पाएगा ऐसे में फिल्म की पूरी कहानी को बदलना पड़ेगा पुनः इसकी शूटिंग करना पड़ेगा यह उन्होंने हवाला दिया इस तरह से फिल्म जानकी को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया।
वहीं दूसरी तरफ फिल्म की प्रचार प्रसार जोर-जोर से चल रही है फिल्म जय शीतला मैया को भी जिसका अप्रूवल होने के लिए जून महीने में आवेदन प्रस्तुत किया गया था फिल्म के निर्माता के द्वारा जिसकी स्क्रीनिंग कमेटी के द्वारा जांच पड़ताल की जानी थी वह भी जांच पड़ताल नहीं हुआ है स्क्रीनिंग कमेटी के द्वारा इस फिल्म को भी सेंसर सर्टिफिकेट नहीं दिया गया कारण क्या है सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष सेंसर बोर्ड के अधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार की जवाब प्रस्तुत करने में असमर्थ है ऐसा प्रतीत होता है कि फिल्म जानकी की तरह जय शीतला मैया को भी सेंसर सर्टिफिकेट नहीं दे पाएगी ऐसा पत्रकार अपने कलम से लिखते हैं जिससे ऐसा साबित हो सकता है फिल्म की प्रचार में ही प्रमोशन में ही सबसे ज्यादा खर्च हो चुकी है सेंसर बोर्ड में जब अप्रूवल आवेदन जमा होता है किसी भी फिल्म का उसके लिए लख रुपए से लेकर न जाने कितने पैसे जमा करने पड़ते हैं यह प्रोड्यूसर डायरेक्टर एवं फाइनेंसर को पता रहता है
जब हमारी जय शीतला मैया को 5 तारीख को रिलीज होना है जिसकी स्क्रीनिंग कमेटी के द्वारा जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है इससे ऐसा लगता है कि इस फिल्म को भी सर्टिफिकेट नहीं दे पाएगा अगर सर्टिफिकेट मिल जाता है तो हमारे राज्य में जितने भी टॉकीज हैं सभी में लग सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि बॉलीवुड और हॉलीवुड की फिल्में को जल्दी सेंसर सर्टिफिकेट दे दिया जाता है और छत्तीसगढ़ राज्य के सभी सिनेमा घर में प्रदर्शित करने के लिए बॉलीवुड हॉलीवुड के डिस्ट्रीब्यूटर सभी टॉकीज को बुक कर लेते हैं और हमारे छत्तीसगढ़ राज्य में बॉलीवुड और हॉलीवुड की फिल्मों को सबसे ज्यादा दिखाया जाता है हमारे राज्य के जितने भी सिनेमा घर हैं सब बॉलीवुड की ओर सबसे ज्यादा रुझान रखते हैं छत्तीसगढ़ी फिल्मों को छोड़कर इससे सर्वाधिक राजस्व छत्तीसगढ़ राज्य से कमाई करती है वही हमारे छत्तीसगढ़ी फिल्मों को छत्तीसगढ़ के सिनेमा घर शोषण का शिकार बना देती है। इस तरह से हमारे संवाददाता की कलम से उपरोक्त दोनों फिल्मों की स्क्रीनिंग कमेटी की पारदर्शिता का घोर अपमान हो रहा है क्योंकि स्क्रीनिंग कमेटी पार दर्शिता के साथ कार्य नहीं कर रही है।

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