
✍️ रिपोर्टर डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव कांकेर छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ उत्तर बस्तर कांकेर जिला के भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम चौगेल में होने वाले नीदरलैंड के डच गुलाब की खुशबू और रंगत न केवल रायपुर में बल्कि अन्य शहरों में भी बिखर रही है। कृषक गिरजा निषाद ने पारंपरिक खेती को छोड़कर गुलाब की खेती शुरू की और सालाना लाखों रूपये की कमाई कर रहे हैं। हाईटेक होती दुनिया मे रहने खुद को हाईटेक होना जरूरी है। भानुप्रतापपुर में रहने वाले कृषक गिरजा निषाद ने अपनी पुश्तैनी खेती में बदलाव लाया है। गिरजा ग्राम चौगेल स्थित अपने एक एकड़ भूमि में बने पॉलीहाउस में गुलाब के फूलों की खेती शुरुआत की और गुलाब के फूलों का उत्पादन कर रहा है। मौसम अनुरूप फसलें बोने के बजाय उन्नत प्रजाति के डच गुलाब की खेती कर रहे हैं। यह डच रोज यानी गुलाब के फूल पूरे खेत को महकाने के साथ गिरजा के बेहतर भविष्य को भी महका रही है, वे इस खेती से रोजाना 9 से 10 हजार रुपए की आय अर्जित कर रहा है।
कृषक गिरजा निषाद ने बताया कि पॉलीहाउस में लाल, सफेद, गुलाबी और पीला गुलाब का रोपण किया है, जहां पर प्रतिदिन 45 से 50 किलोग्राम फूल का उत्पादन हो रहा है, जिसे 02 सौ रुपए प्रति किलोग्राम की दर से रायपुर में पैकेजिंग कर बिक्री के लिए भेजा जाता है, जिससे रोजाना 9 से 10 हजार रुपए की आमदनी हो रही है। वहीं 20 नग गुलाब गुलदस्ता की कीमत 240 रुपए में बिकती है यानि एक फूल की कीमत 12 रुपए है। पॉलीहाऊस में फूलों की तोड़ाई एवं देखभाल के लिए चार मजदूर रखा गया है। उन्होंने बताया कि अन्य फसल में तीन से चार माह की कड़ी मेहनत के बाद एक बार ही उत्पादन मिलता है, लेकिन गुलाब की खेती में रोपण के दो से तीन महीने के बाद से उत्पादन शुरू हो जाता है, जो लगातार तीन सालों तक चलता रहता है। तीन वर्ष बाद गुलाब के डंठल का फिर से रोपण कर समय-समय पर देखरेख और कांट-छांट किया जाता है।
कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि गुलाब की खेती करने वाले किसानां को उद्यानिकी विभाग और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सहयोग मिलता है, जिससे किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहन और बाजार दोनों मिल सके। चौगेल के किसान गिरजा निषाद ने गुलाब की खेती और पॉलीहाउस निर्माण के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से 50 प्रतिशत अनुदान पर 31 लाख रुपए का सब्सिडी लिया है। किसान का चौगेल स्थित भूमि पथरीली मरहान भूमि होने से अनाज की फसल लेना संभव नहीं था। इस तरह की अनुपयोगी भूमि में गुलाब की सफल खेती कर दिखाना काबिले तारीफ है। गुलाब की खेती के लिए मिट्टी छिद्रपूर्ण एवं अच्छी जल निकासी होनी चाहिए। गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है गुलाब एक बहुत ही आकर्षक सुंदर मनमोहक फूल है, गुलाब की राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजारो में काफी मांग है, गुलाब की खेती से कृषक अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकता है। गुलाब के फूलों से गुलकंद, गुलाब जल, तेल, सौंदर्य प्रोडक्ट साबुन अगरबत्ती, इत्र, जैम जैली, पेय पदार्थ इत्यादि बनाए जाते हैं।

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