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Bihar News शिक्षकों की शिक्षा चरम पर है, बच्चों की शिक्षा अधर में लटका

रिपोर्टर सोनू खान कटिहार बिहार

जहां एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रयासरत है वही सरकार के मुलाजिम के द्वारा स्कूल में ना रहने की गवाही दे रहा है वह कहावत बिल्कुल सटीक बैठता है कि 11 बजे लेट नहीं और 2 बजे भेंट नहीं ताजा मामला अमदाबाद प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बलुआ गांव का है जहां 2 बजे के बाद ना तो शिक्षक का पता रहता है और ना ही बच्चे का मामले को लेकर कई ग्रामीणों ने बताया कि इस विद्यालय का पिछले कई सालों से यही हाल है हमारे गांव के बच्चे का पठन-पाठन पूरी तरह बाधित हो गया है वहीं कैमरा के सामने गांव के ही एक व्यक्ति प्रधानाध्यापक की कुर्सी पर बैठे हुए नजर आए इस संबंध में जब हमने उससे पूछताछ किया तो उन्होंने कहा कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभी नहीं है मैं अभी ऐसे ही बैठा हूं वही इस संबंध में सहायक शिक्षक से बात किया तो उन्होंने कहा कि हम लोग कुल 9 शिक्षक हैं जिसमें 1 शिक्षक जनगणना के लिए गए हुए हैं प्रधानाध्यापक आज आए नहीं हैं वही 5 शिक्षक छुट्टी पर है वही वर्तमान समय में विद्यालय में 2 शिक्षक मौजूद पाए गए थे हालांकि बच्चे की अगर बात की जाए तो एक भी बच्चे नहीं पाए गए विद्यालय के कई रूम में ताला लटका हुआ पाया गया जबकि सरकार के द्वारा निर्देश जारी कर कहा गया है कि दिन के 10 बजे से लेकर 3 बजे तक विद्यालय परिसर में बच्चों की उपस्थिति रहेगी और 4 बजे तक यानी 1 घंटा शिक्षक को अपने कागजी प्रक्रिया को लेकर कार्य करना है लेकिन यह बातें केवल हवा हवाई साबित हो रही है इस संबंध में जब मैं स्कूल के प्रधानाध्यापक नरेश कुमार सिंह से दूरभाष पर संपर्क किया तो उन्होंने हम पर एफ आई आर कराने की धमकी दे डाली वहीं उन्होंने कहा कि दूसरी बार अगर आओगे तो तुम्हें धक्के मार कर भगा देंगे इस शब्द को आप भी जरा सुनिए और खुद से विश्लेषण कीजिए कि जब एक गुरु की भाषा इस प्रकार निकलती हो तो वह बच्चे को क्या शिक्षा देते होंगे यह सवाल अभी भी समाज के लिए बना हुआ है हालांकि इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार झा कहते हैं कि अगर इस तरह की बात हुई है तो इसको लेकर प्रधानाध्यापक से बात करूंगा वहीं उन्होंने विद्यालय में बच्चे नहीं पाए जाने पर कहा कि इसके बारे में आपको प्रधानाध्यापक से ही पूछ लेना चाहिए था गौरतलब हो कि सरकार के द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत सब पढ़े सब बढ़े का नारा दिया जाता है लेकिन यहां विद्यालय के प्रधानाध्यापक अपनी मनमानी का ताल ठोकते नजर आ रहे हैं अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले को लेकर अधिकारी के द्वारा क्या संज्ञान लिया जाता है या फिर इसे लीपापोती कर मामला को निपटा दिया जाता है यह अभी भी जांच का विषय बना हुआ है

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