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Rajasthan News पंच दिवसीय पर्व मनेगा छह दिवसीय पर्व के रूप में।

ब्यूरो चीफ कपिल देव शर्मा नीमकाथाना  राजस्थान

हसामपुर। हनुमानवाटिका धाम के महाराज यज्ञाचार्य मनोज शर्मा
ने बताया कि इस बार पंचदिवसीय पर्व 6 दिवस का होगा। महाराज श्री ने बताया कि दीपावली एक दिन का पर्व न होकर पंच दिवसीय महापर्व है। दीप पर्व का मुख्य कर्मकाल प्रदोष होता है।
अमावस्या पहले दिन 31/10 /2024 गुरुवार को दोपहर बाद 03.53 बजे से प्रारंभ होकर दूसरे दिन 1/11 को सायं 06.17 बजे तक रहेगी ।दोनों दिन प्रदोष काल में रहेगी।
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि
पंचांग निर्माण के अंतर्गत धर्मसिंधु, निर्णय सिंधु, पुरुषार्थ चिंतामणि और तिथी निर्णय आदि प्रामाणिक ग्रंथों का आश्रय लेकर वर्ष भर मनाए जाने वाले व्रत ,पर्वों का निर्णय किया जाता है।
इस बार दो दिन प्रदोष काल व्यापिनी अमावस्या है।
शास्त्रों में आदेश किया है कि इस स्थिति में दूसरे दिन लक्ष्मी पूजन करना चाहिए चाहे प्रदोष में अमावस्या स्पर्श मात्र भी कर रही हो।

(निर्णय सिंधु ) जिस दिन अमावस्या दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरे दिन दीपावली माननी चाहिए | यह नियम निर्णय सिंधु में स्पष्ट लिखा है “दंडैक रजनीयोगे दर्श : स्यात् परेऽहनि | तदा विहाय पूर्वेद्यु : परेऽहनि सुख रात्रिका ” इसका अर्थ है जब दो दिन अमावस्या प्रदोष काल में हो तो दूसरे दिन अमावस्या अगर एक दंड यानि एक घटी (24 ) भी हो तो पहले दिन को त्याग कर दूसरे दिन दीपावली मनावे क्योंकि पहले दिन की जगह दूसरे दिन सुख रात्रि होती है | इसमें कोई संशय नहीं है।
धर्मसिंधुकार ने और भी स्पष्ट किया है
((धर्मसिंधु ) “सूर्योदयं व्याप्तास्तोत्तरं घटिका रात्रिव्यापनी दर्शे सति न संदेह: |
अर्थात दूसरे दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक अगर एक घड़ी ( 24 मिनट) भी अमावस्या हो तो दूसरे दिन ही लक्ष्मी पूजन होगा
इसमें कोई संदेह नहीं है। गूढ़ अर्थ है कि 24 मिनट बाद तक हो तो संदेह नहीं है मान्य तो एक पल का भी है।
(3) (पुरुषार्थचिन्तामणि)
…. तच्चोत्तरदिनेऽस्तोत्तरं घटिकाद्यवच्छेदेन विद्यते
इसको निम्नानुसार समझा गया है –
तत् च उत्तर दिने अस्तोत्तर घटिकाद्यः अवच्छेदेन विद्यते॥
यहाँ गौर करने लायक है कि प्रसिद्ध ग्रंथ अमरकोश में रजनी या रात्रि का अर्थ सूर्य अस्त से लेकर सूर्योदय तक का समय।

(4) स्वाती नक्षत्र अगर मिल जाता है तो और भी उत्तम है। स्वाती नक्षत्र भी शुक्रवार पूरी रात 3.28 बजे तक रहेगा ।

अबकी बार इस दीपावली पर्व पर लक्ष्मी पूजन का शास्त्र अनुसार क्रम पूरा लिए है
भविष्य पुराण में बताया है कि प्रदोष समय में लक्ष्मी पूजन क्रमानुसार करना चाहिए।
आचार्य श्री ने पूजन के क्रम बताएं
1.प्रातः स्नान
2. अपरान्ह में श्राद्ध कर्म
3. प्रदोष काल में महा लक्ष्मी पूजन ,दीपदान

लक्ष्मी पूजन के क्रम में अमावस्या का श्राद्ध 01/11/2024 शुक्रवार को है।

 

पंचदिवसीय पर्व 6 दिवसीय पर्व के रूप में

1.धन त्रयोदशी (धन तेरस) ,धन त्रयोदशी के लिए सायं दीपदान
29/10/2024
मंगलवार

2. नरक व रूप चतुर्दशी
30/10/2024
बुधवार

3. छोटी दिवाली
31/10/2024
गुरुवार
4. पितृकार्य अमावस्या 01/11/2024 शुक्रवार
व महालक्ष्मी पूजन

5. अन्नकूट ,गोवर्धन व बलिराज पूजा
02/11/2024
शनिवार
6. भाई दूज ,यम द्वितीया 03/11/2024 रविवार

साथ ही महाराज श्री ने दीपावली महापर्व पर सुख ,समृद्धि और प्रसन्नता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की।

 

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