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Jharkhand News झारखंड में शुक्रवार को ही भारी भरकम बजट पेश हुआ. इस बजट में धनबाद को मायूसी हाथ लगी.

रिपोर्टर राजू अंसारी कतरास झारखंड

धनबाद किसी के आगत स्वागत में कोई कमी नहीं करता. सभी राजनीतिक दल यहां जमीन तलाशते हैं. राज्य के सरकारी खजाने में यह जिला प्रतिवर्ष लगभग 2000 करोड़ रुपया देता है, फिर भी इसके साथ सरकार और एजेंसियां छल करते हैं. झारखंड में शुक्रवार को ही भारी भरकम बजट पेश हुआ. इस बजट में धनबाद को मायूसी हाथ लगी. धनबाद के हिस्से में केवल 3 योजनाएं आई. इनमें एक है धनबाद में आदिवासी छात्रावास का निर्माण. साथ ही 2 सड़कों की 4 लेन करने की घोषणा की गई है. यह सड़के हैं गोविंदपुर से टुंडी गिरिडीह होते हुए कोडरमा तक की सड़क और गोविंदपुर से जामताड़ा, दुमका ,बरहेट होते हुए साहिबगंज सड़क.

धनबाद के लोगों की सबसे बड़ी जरूरत बैंक मोड़ फ्लाईओवर की तरह एक दूसरा फ्लाईओवर है. लोग मौजूदा फ्लाईओवर पर हर दिन घंटों जाम में फंसे रहते हैं. जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग ने पूजा टॉकीज से नया बाजार होते हुए बैंक मोड़ तक फ्लाईओवर के लिए सर्वे किया है. जमीन हस्तांतरण के लिए पत्राचार किया गया है. लेकिन बजट में इसकी कोई चर्चा नहीं हुई. बैंक मोड फ्लाईओवर भी बुरा हाल में है. तुरंत मरम्मत मांग रहा है. एयरपोर्ट की मांग भी धनबाद के लोग सालों साल से कर रहे हैं. पक्ष-विपक्ष के बड़े छोटे नेता इसकी चर्चा करते हैं. धनबाद के लोगों को उम्मीद थी कि बजट में एयरपोर्ट के लिए जमीन देने की घोषणा की जाएगी. बजट भाषण में इसका जिक्र तक नहीं हुआ. बोकारो, दुमका में अगले साल हवाई सेवा शुरू करने की घोषणा की गई है. राज्य सरकार दुमका, साहिबगंज में एयरपोर्ट के लिए जमीन उपलब्ध करा रही है. लेकिन उसका कोई ध्यान धनबाद पर नहीं है. बोकारो में पहले से ही सेल का हवाई अड्डा बनकर तैयार है.

एक सप्ताह से धनबाद जिले में 10 से 12 घंटे की बिजली कटौती हो रही है. लोग परेशान हैं, बावजूद कहीं से कोई आवाज नहीं उठ रही है. बात-बात में आंदोलन करने वाले नेता भी इस मामले में चुप्पी साध बैठे हुए हैं. होली का त्यौहार है, लोग तैयारी में जुटे हुए हैं. होली मिलन समारोह आयोजित कर नेता अपना चेहरा चमकाने में लगे हुए हैं और धनबाद तरह तरह की परेशानियों से जूझ रहा है. लेकिन धनबाद की आवाज रांची या दिल्ली पहुंच नहीं रही है. तो क्या कहा जा सकता है कि धनबाद के माथे पर भस्मासुर का हाथ पड़ गया है. खुद के कोयले से देश को रोशन करने वाला धनबाद बिजली संकट झेल रहा है. 2000 करोड़ प्रति साल सिर्फ राज्य सरकार को देने वाला धनबाद परेशानियां झेल रहा है. और यहां की कमाई के बदौलत रांची से लेकर दिल्ली तक की झक झक खादी चमक रही है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि धनबाद का अब तो भगवान ही मालिक है.

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