Madhya Pradesh News आबकारी अधिकारी बीआर वैध ने शराब माफियाओं को दिया अभयदान
ग्रामीण क्षेत्रों में दूध मिले या ना मिले शराब जरूर मिल जाएगी जबकि ग्रामीण क्षेत्र दूध दही के लिए प्रसिद्ध थे

✍️रिपोर्टर ब्यूरो राजू जोशी महाराज छतरपुर मध्य प्रदेश
शराब,चाहे वैध बेचों या अवैध हमें सिर्फ राजस्व से मतलब,विभाग नही करेगा कोई कार्यवाही राजस्व का हवाला देकर जमकर उड़ाई जा रही आबकारी नियमों की धज्जिया ज्यादातर एक्सीडेंट एवं लड़ाई झगड़े निम्न प्रकार के अपराध सिर्फ हर चौराहे पर शराब मिलने से पनप रहे हैं एक तहसील में कम से कम 5 दुकान है तो सरकारी है और प्रशासनिक लोगों की मिलीभगत से अनगिनत अवैध रूप से चल रही होती है कई ग्राम पंचायतों में शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाली आंगनबाड़ी और ग्राम पंचायतों के सामने ही शासकीय शराब के ठेके खोल दिए गए हैं ऐसा नहीं है वरिष्ठ अधिकारियों का आना नहीं होता समय-समय पर खानापूर्ति करने ग्राम पंचायत व आंगनबाड़ी का निरीक्षण करने भी अधिकारी आते हैं बस उन्हें शराब की दुकान दिखाई नहीं देती जो सिर्फ 40 फुट की दूरी के जस्ट सामने है
छतरपुर यह सब जानते है की प्रदेश सरकार की राजस्व का प्रमुख स्रोत आबकारी विभाग है। जहां करोड़ों रुपए का राजस्व प्रत्येक माह जिले से सरकार के पास पहुंचता है। का कारोबार करने के लिए आबकारी विभाग द्वारा कुछ नियम व शर्तें बनाई गई है जिन के अनुरूप ही कोई भी व्यक्ति शराब का कारोबार कर सकता है इन्हीं नियमों की धज्जियां जिले आबकारी अधिकारी बीआर वैध द्वारा में उड़ाई जा रही हैं और हवाला सरकार के राजस्व का दिया जागली, मोहल्लों में बिक रही अवैध शर तो ऐसे हैं जहां पर आंगनवाड़ी ग्राम पंचायत के सामने शराब की दुकान है ग्राम पंचायत में कई प्रशासन द्वारा फॉर्मेलिटी के रूप में आयोजन किए जाते हैं जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी आते हैं पर उन्हें नहीं दिखाई देती शराब की दुकान आंगनबाड़ी में भी कई अधिकारी आते हैं लेकिन मैं क्या लेना-देना सामने शराब की दुकान से और बच्चों के भविष्य से
आबकारी विभाग शराब के अवैध कारोबार को रोकने का दावा तो करती है, लेकिन इसकी सच्चाई इससे उलट है। यदि बात करे विगत पांच वर्ष के अंतराल की तो जहरीली शराब पीने से लगभग आधा दर्जन लोग अपनी जान गवां चुकी है। इसके बावजूद जिले में अवैध शराब का कारोबार व्यापक स्तर पर फल फूल रहा है। अवैध शराब तस्करों से आबकारी का गठजोड़ रहता है। इसी वजह से सिर्फ दिखाबे लिए ही कार्यवाहियों को अंजाम दिया जाता है। जब से आबकारी अधिकारी के रूप में बीआर वैद्य ने पदभार संभाला है जिले में शराब माफियाओं के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं मनमाफिक रेत पर शराब बेचने से लेकर शहर गांव तक छोटे-छोटे कस्बों में शराब के अवैध ठेके संचालित है।
नई पदस्थापना के साथ होती है अवैध शराब माफियाओं पर बड़ी कार्यवाही, मामला सेट होते ही सब रफा-दफा
अक्सर देखा गया है की जब भी कोई आबकारी अधिकारी बदलता है और नई जगह पदस्थापना पर जाता है जाते ही वहां रौब झड़ने के लिए बड़ी बड़ी कार्यवाहियां कर अपना रुतबा दिखाते है। लेकिन जैसे ही इनका तालमेल या गठजोड़ शराब माफियाओं से होते ही सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
आपकारी विभाग करता है फर्जी कार्यवाहियां ठेकेदारों,ढाबे वालों से लेते हैं फर्जी केस
आबकारी विभाग को दिखाने के लिए प्रत्येक माह कुछ ना कुछ कार्यवाहियां अवैध शराब बिक्री पर करनी पड़ती है इसके लिए आबकारी विभाग अपने उन्हीं चहेते ठेकेदारों,ढाबा संचालकों, होटल संचालको पर दबाव डालते है जहां से उन्हें फर्जी केस आसानी से मिलने की उम्मीद होती है ढाबा,होटल व ठेकेदार कहीं ना कहीं से ऐसी व्यवस्था कर देते हैं कि आबकारी विभाग आराम से केस बनाकर अपने रिकॉर्ड को मेंटेन कर सके इस तरह की कार्रवाई अक्सर ढाबा पर देखने को मिलती हैं।
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