Madhya Pradesh News मंडला से श्रावक समूह 9 और 16 को पहुंचेंगे कुण्डलपुर

रिपोर्टर जितेंद्र कुमार भलावी मंडल मध्य प्रदेश
मंडला । आचार्य विद्यासागर के स्थान पर उनके श्रेष्ठ शिष्य समय सागर आचार्य पद ग्रहण करेंगे औपचारिक समारोह कुण्डलपुर में 16 अप्रैल को होगा। अनुमोदना के लिए मुनियों और आयिर्काओ का विहार कुण्डलपुर रवाना हो गया हैं| आचार्य विद्यासागर को संलेखना के दौरान समय सागर को आचार्य होना तय किया था| वह आचार्य श्री की समाधि के बाद से उनके दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं| नव आचार्य का कुण्डलपुर में प्रवेश 9 अप्रैल को होगा | विज्ञप्ति जारी करते हुए सीए रोहित जैन ने बताया कि उनकी अगवानी के लिए 9 अप्रैल एवं आचार्य पदारोहण दिवस पर 16 अप्रैल को मंडला के जैन मतावलंबी कुण्डलपुर पहुंचेंगे।

मंडला से रिश्ता : पूज्य आचार्य श्री का प्रथम मंडला आगमन 1990 मे हुआ था तब पड़ाव जैन मंदिर के विस्तार हेतु जैन समाज मंडला के श्रावको से भूतल के ऊपर की छत दान प्राप्त हुई, मार्च 2000 मे आगमन होने पर प्राप्त दान राशि से गौशाला की भूमि क्रय कर गौशाला का निर्माण किया गया, जुलाई 2013 मे महावीर जैन मंदिर मे वेदी प्रतिष्ठा आचार्य श्री के सानिध्य मे सम्पन्न हुई, सन 2016 मे कुंडलपुर महोत्सव मे आचार्य श्री से मंडला मे आदिवासी भाइयो हेतु रोजगार के लिए हथकरघा खोलने हेतु आशीँवाद प्राप्त हुआ एवं आचार्य श्री का मंडला आगमन 8 बार होकर अंतिम बार मार्च 2017 मे 3 दिन का प्रवास होकर चंद्रगिरी जैन तीर्थ के लिए गमन हुआ था जून 2017 मे मुनि श्री 108 विमलसागर जी की प्रेरणा से उदयचौक मे आचार्य श्री के पचासवे मुनि दीक्षा दिवस संयम स्वर्ण महोत्सव पर कीर्ति स्तम्भ का निर्माण किया गया है एवं नवम्बर 2021 मे पचासवे आचार्यपदारोहण दिवस पर मुनि एलेक श्री 105 धेर्य सागर जी की प्रेरणा से संस्कृति शासनाचार्य महोत्सव वर्ष 2021-22 मे 22-11-2021 को विशेष आवरण एवं सील का मंडला डाकघर से निगमन एवं विमोचन किया गया था.
कार्य कुशलता, गंभीर और शांत व्यक्तित्व के गुण :
शशांक भैया जी ने बताया कि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर के समाधिस्थ होने के बाद रिक्तता की पूर्ति उन्हीं के ज्येष्ठतम, साधना के चरम को प्राप्त निर्यापक मुनि समयसागर आचार्य पद के दायित्व को ग्रहण करेंगे। संघ संचालन और संघ में निर्देशित गूढ़ अध्ययन-अध्यापन की कार्य कुशलता, गंभीर और शांत व्यक्तित्व, निस्पृह वृत्ति आदि गुणों में उन्हें आचार्य विद्यासागर के समस्त शिष्यों और अनुयायियों ने पुन: उसी पद पर प्रतिष्ठित किया हैं।

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