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Uttar Pradesh News यहां पूजा लगता है विशाल मेला कानपुर संबाद दाता एतिहासिक नगरी खजुहा फतेहपुर यूपी में एक ऐसी जगह है

रिपोर्टर कमलेश कुमार शुक्ला कानपुर उत्तर प्रदेश

कानपुर:- एतिहासिक नगरी खजुहा यहां नहीं जलाया जाता है रावण होती है यहां पूजा लगता है विशाल मेला कानपुर संबाद दाता एतिहासिक नगरी खजुहा फतेहपुर यूपी में एक ऐसी जगह है जहां इस समय रामलीला का मंचन हो रहा है सुननें में यह बात भले ही अटपटी लगती है लेकिन यह सोलह आने सच फतेहपुर ज़िले में खजुहा कस्बे का एतिहासिक मेला इन दिनों अपने शबाब पर है इस मेले की खासियत है कि ये दशहरा के दिन से शुरू होता है और उसके बाद यहां रामलीला शुरू होती है यहां दशहरा के बाद रामलीला मनाने की परम्परा लगभग 525 सालों से चली आ रही है हमारे संबाद दाता कमलेश शुक्ला के पुरखों की जन्म भूमि रहीं हैं खजुहा नगरी आज भी हम लोग खजुहा नगरी के नाम से दीपावली के दीपक जलाते आ रहें हैं इसलिए अपनी जन्मभूमि की याद में प्राचीन कहानी लिख डाली है खजुहा नगरी स्वतंत्रता सेनानियों का गढ़ भी रहा है यहां सेनानियों ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये हैं यहां पर हम पथेश्वरी देवी का प्राचीन मंदिर है जो दक्षिण में स्थित है बशी वाला मठ बाजार में तीन राधाकृष्ण मंदिर इस प्राचीन सांस्कृतिक नगरी में 118 छोटे बड़े शिवालय तथा इतने ही कुएं है चारों दिशाओं में चार बड़े विशाल काय तालाब इस नगर की चारों दिशाओं में शोभायमान है जो इस नगर के स्वर्णिम युग की याद दिलाते हैं विदेशी पर्यटक आज भी इस नगरी को प्राचीनतम धरोहरों को देखने आते हैं विशाल नगरी खजुहा में अंग्रेजों द्रारा 52 लोगों को जिंदा इमली के पेड़ में लटका कर फांसी दे दी थी आज भी इमली का पेड़ बावनी इमली के नाम से प्रसिद्ध है आप जाकर देख सकते हैं शहीद पार्क खजुहा नगरी में कहा जाता है कि इस नगरी में एक ऐसी सुरंग बनी थी जिसके अंदर राजा महाराजा घुड़सवारी कर दिल्ली तक का सफर तय करते थे जय जन्मभूमि नगरी खजुहा !

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