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Madhya Pradesh News नवरात्र के तीसरे दिन महादन मंदिर में मां चंद्रघंटा का हुआ श्रृंगार बजरंग मोहल्ले में भक्तों ने उतारी मां की आरती

रिपोर्टर मुहम्मद ख्वाजा टीकमगढ़ मध्यप्रदेश

पलेरा   स्थानीय नगर के वार्ड क्रमांक 9 में स्थित महादन मंदिर धार्मिक और पौराणिक इतिहास समेटे हुए है । इस सिद्ध मंदिर के बारे में कहा जाता है कि सच्चे मन से यहां पूजा करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि के महापर्व पर यहां पिछले 40 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। बताया गया है कि शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को माता के तीसरे रूप माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की गई। भक्तों ने देवी मंदिरों में वैभव रक्षिणी रक्तबीज हंता माता चंद्रघंटा की विधि विधान से पूजा अर्चना की और अभिष्ट की कामना की। माता के विग्रह की आरती उतार कर प्रसाद का वितरण किया। इस दौरान देवी मंदिर माता के जयकारे से गुंजायमान रहे। मंदिरों पर देवी गीतों से माहौल भक्तिमय रहा। वहीं घरों में भी माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की गई और माता के नाम का जाप किया। इसके अलावा कई पूजा पंडालों में कलश और छोटी मूर्तियां रख कर पूजा अर्चना की गई। नगर के पंडित श्यामाचरण मिश्रा बताते हैं कि मां का तीसरा रूप राक्षसों का वध करने के लिए जाना जाता रहा है। वैसे मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं, इसलिए उनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष रहता है। इसके अलावा यह माना गया है कि मां चंद्रघंटा को घंटों की नाद बेहद प्रिय रही है। वे इससे दुष्टों का संहार तो करती हैं, वहीं इनकी पूजा में घंटा बजाने का खास महत्व रहता है। माना जाता है कि इनकी उत्पत्ति ही धर्म की रक्षा और संसार से अंधकार मिटाने के लिए हुई थी। पंडित मिश्रा बताते हैं कि मान्‍यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना भक्त को आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करती है। नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की साधना कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले भक्तों को संसार में यश, कीर्ति और सम्मान मिलता है।।

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