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Madhya Pradesh News मनुष्य जन्म का मेंन उद्देश्य भक्ति करना भक्ति कर के सतलोक जाना है

 रिपोर्टर श्रवण वर्मा जिला गुना मध्य प्रदेश

बारा जिले के अटरू तहसील के अग्रवाल धर्मशाला कवाई कस्बे में सत्संग संपन्न हुआ जिसमें पवित्र चार वेद पवित्र 18 पुराण पवित्र 6 शास्त्र पवित्र बाइबल पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब पवित्र धर्म के पवित्र शास्त्रों के आधार पर ज्ञान बताया गया और समाज में फैल रही कुरीतियों, बुराइयां, नशा ,चोरी ,रिश्वतखोरी , वरुण अत्या दहेज प्रथा जैसी कहीं आडंबर समाप्त करने के लिए एलईडी के माध्यम से ज्ञान बताया गया समाज में भाईचारा बना रहे सत्संग में सैकड़ो की तादात में महिलाएं पुरुष श्रद्धालु सत्संग सुनने के लिए पहुंचे । संत रामपाल जी महाराज जी ने सत्संग में बताया है कि जीव हमारी जाती है मानव धर्म हमारा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा संत रामपाल जी महाराज ने सत्संग में बताई की सच्ची भक्ति और सत्संग मिलने से ही आत्म कल्याण का मार्ग प्रस्तुत होता है जिससे समाज के लोगों को एक नहीं जीने की राह मिलती है, कबीर पंथी संत रामपाल जी महाराज का प्रोजेक्टर के माध्यम से सत्संग का आयोजन इस मंगलवार 29 अगस्त2023 किया गया जिसमें दूर-दूर से लगभग 500,,1000,, की संख्या में सत्संग सुनने के लिए पहुंचे सत्संग में संत रामपाल जी महाराज जी ने बताया कि मनुष्य का मुख्य उद्देश्य भक्ति करके भगवान के पास जाना है यदि हम सब भक्ति नहीं करते हैं तो मनुष्य के जीवन और पशु के जीवन में कोई अंतर नहीं यदि हम मनुष्य जन्म में रहते हैं भक्ति नहीं करेंगे तो फिर गधे कुत्ते आदि 84 लाख योनियों में कष्ट उठाने पड़ेंगे भक्ति भी शास्त्र अनुकूल होनी चाहिए अन्यथा मनमाना आचरण व्यर्थ है श्रीमद् भागवत गीता के अध्याय नंबर 16 के श्लोक नंबर 23 में कहा है कि जो पुरुष शास्त्र विधि को त्याग कर अपनी इच्छुक से मनमाना आचरण करता है वह तो ना सिद्धि को प्राप्त होता है ना परम गति को प्राप्त होता है और नहीं सुख होता है संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का कहना है कि वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही वही पूर्ण संत है जो सर्व धर्म के शस्त्र से प्रमाणित ज्ञान भक्ति विधि बता रहे हैं उनकी बताई भक्ति से लाखों लोगों ने नशा छोड़कर सभ्य जीवन जी रहे हैं सतभक्ति करने से लाको लोगों असाधद रोग से भी निजात पाए हैं संत रामपाल जी महाराज की सत्संग का ज्ञान समझकर संत रामपाल जी महाराज जी से 11 पुण्य आत्माओं ने मर्यादा में रहकर भक्ति करने की शपथ ग्रहण कि है।

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