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Madhya Pradesh News जैन समाज ने मनाया श्री पार्श्वनाथ निर्वाण महोत्सव श्री पार्श्वनाथ जिनालय में हुआ पार्श्वनाथ विधान – श्रावकगणों ने चढ़ाया निर्वाण लाडू

रिपोर्टर दीपक गाडरे छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश

छिंदवाड़ा  श्रावण शुक्ल सप्तमी बुधवार के शुभ दिन प्रातः काल की मंगल बेला पर नई आबादी गांधी गंज स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जिनालय श्री पार्श्वनाथ भगवान की जय, निर्वाण महोत्सव की जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
मंगलमय प्रसंग था वर्ष 2023 में 23 अगस्त को जैन दर्शन के 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथजी के 28 सौ वें निर्वाण अर्थात मोक्ष कल्याणक महोत्सव का जिसे सकल जैन समाज के साथ श्री दिगम्बर जैन मुमुक्षु मंडल एवं अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन ने विविध अनुष्ठानों के साथ भक्ति भाव पूर्वक मोक्ष सप्तमी के रूप में मनाया।
फेडरेशन सचिव दीपक राज जैन ने बताया प्रातःकाल की मंगल बेला पर बड़ी संख्या में श्रावक – श्राविकाओं ने वीतरागी देव – शास्त्र – गुरु भगवंतो के साथ श्री पार्श्वनाथ पूजन एवं विधान कर निर्वाण कल्याणक का प्रतीक निर्वाण लाडू चढ़ाया। जिसमे बाल ब्रह्मचारी पंडीतश्री निखिल शास्त्री मुंबई, ऋषभ शास्त्री, दीपक राज जैन, प्रत्यूष जैन, वर्धमान जैन, रूपेंद्र शास्त्री, सिद्धांत जैन ने सुमधुरगान कर पंचकल्याणक महोत्सव की यादें ताजा कर दी।
मंगल प्रवचनों का मिला लाभ –
पूजन विधान के बाद मुंबई से पधारे बा. ब्र. निखिल शास्त्री ने कथा के माध्यम से पार्श्वनाथ भगवान के 10 भावों का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो धर्मात्मा एवं सज्जन पुरुष उसमे समता धारण कर आत्म चिंतन करते हैं। किसी को दोष न देकर स्वयं विचार करते हैं की सामने वाला जो हम पर उपसर्ग कर रहा है, उसमे उसकी क्या गलती है, हमने ही पूर्व जन्म में उसका कुछ न कुछ अहित किया होगा जो वर्तमान भव में हमारे उदय में आ रही है अतः इसे समता भाव से सहन कर आत्मकल्याण में मन लगाओ। पार्श्वनाथ भगवान के प्रति कमठ के जीव का 10 भव तक बैर चला, पार्श्व प्रभु ने समर्थ होने पर भी कभी भी उसका प्रति उत्तर नही दिया और अपनी आत्म साधना में लीन रहे जिसके फल में वे आज निर्वाण को प्राप्त कर परिपूर्ण सुख स्वरूपी दशा मोक्ष लक्ष्मी को प्राप्त कर सदा सदा के लिए सुखी हो गए। आज के दिवस पर हम सबको भी पार्श्व प्रभु से शिक्षा लेकर उनके बताए मार्ग पर चलकर आत्म कल्याण करना चाहिए।
विविध साहित्यिक कार्यक्रम हुए –
मोक्ष सप्तमी पर बड़ी संख्या में बालिकाओं ने उपवास रखा जिन्हे बाल ब्रह्मचारी डॉक्टर आरती बहन ने सुंदर सुंदर साहित्यिक कार्यक्रमों के माध्यम से महा सतियों का जीवन चरित्र बताकर उन जैसा बनकर मनुष्य जन्म सफल करने की बात कही।
रात्रि के समय सुंदर जिनेन्द्र भक्ति के पश्चात सकल समाज ने बा. ब्र. निखिल शास्त्री के श्रीमुख से संगीतमय कथा का श्रमण कर श्री पार्श्व प्रभु का जीवन दर्शन जाना।

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