Uttar Pradesh News झमाझम बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया यलो अलर्ट दर्जनों गांवों में बाढ़ की आशंका
लखीमपुर खीरी करीब एक सप्ताह बाद जिले में हुई झमाझम बारिश से गर्मी से तो राहत मिली है तो कई जगहों पर जलभराव से लोगों की दिक्कतें भी बढ़ गईं।

रिपोर्टर रोहित पाल हरदोई उत्तर प्रदेश
पिछले कई दिनों से उमस भरी गर्मी हो रही रही थी। बूंदाबांदी से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही थी। रविवार सुबह तेज बारिश शुरू हुई। दिन में कई बार झमाझम बारिश से धरती तर हो गई। फसलों में एक बार फिर हरियाली लौट आई है। सुबह 10 बजे शाम पांच बजे तक 35 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। उधर, मौसम विभाग ने जिला खीरी समेत कई जिलों में यलो अलर्ट जारी करते हुए भारी बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के जारी अलर्ट में कहा गया है कि तेज हवाओं और बादलों की गरज के साथ बारिश होगी, बिजली भी गिर सकती है।
शारदा नदी उफनाई, पानी से घिर गए निचले इलाके
महेवागंज/सुंदरवल पहाड़ों पर बारिश और बनबसा बैराज से छोड़े जा रहे अतिरिक्त पानी से शारदा नदी उफान पर है। इससे फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा तटबंध के अंदर बसे दर्जनों गांवों में बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। रविवार को मिलपुरवा-गूम समेत कई मुख्य मार्गों पर बाढ़ का पानी चलने लगा है। तटबंध तक पानी पहुंचने से निचले इलाके में बसे खगईपुरवा, खांभी, बड़ागांव, बसहा भूड़, खमरिया, लगड़ीपुर, कुचिल्हा, गूम, टॉपरपुरवा, बाबापुरवा, बहालीपुरवा, मेहंदी सहित दर्जनों गांव में बाढ़ की आशंका है। श्रीनगर से बसहा मेंहदी सहित कई गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर दो फुट पानी चलने लगा है। ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। खगईपूरवा गांव के चारों ओर बाढ़ का पानी है। प्रभावित लोग छतों या तटबंध पर अस्थाई डेरा डालने लगे है। गांव में पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। निचले इलाके में खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। पशुओं के लिए चारे की किल्लत होने लगी है।
डूबे बालक का नहीं लगा पता
एनडीआरएफ की टीम शारदा नदी के तटबंध में डूबे श्रीनगर गांव निवासी बैजनाथ के पुत्र अंश (10) की खोजबीन के लिए दूसरे दिन भी डटी रही। नदी के तटबंध का चप्पा-चप्पा छाना मगर कुछ पता नहीं लगा। अंश शनिवार सुबह श्रीनगर गांव के सामने रपटा पुल से फिसल कर शारदा नदी के बहाव में गुम हो गया था।
मोटेबाबा गांव में हो रहा तेजी से कटान
धौरहरा। दस साल पहले घाघरा नदी के कटान से उजड़े लोगों के फिर उजड़ने की नौबत आ गई है। यह कटान पीड़ित दूसरी जगह घर बनाकर रह रहे थे। अब उनकी यह बस्ती भी कटान की जद में आ गई है। मोटेबाबा के भगौती, मेवा, सरवन, रामासरे के घर नदी में समा गए हैं, जो अपने खेतों में घर बना कर रह रहे थे। कृषि योग्य भूमि को काटने के बाद नदी आबादी की ओर बढ़ रही है। अब न खेती करने के लिए जमीन बची है और न ही रहने के लिए आशियाना बचने की उम्मीद। बोकरिया, माथुरपुर, सुजानपुर, कुर्तैहा, मोटेबाबा, रामनगरबागहा, गुलरिया, अग्घरा, परौरी आदि गांवों के हजारों किसानों की भूमि नदी की धारा में समा चुकी है। राम नगर बगहा के किसानों का कहना है कि घाघरा नदी दस वर्ष पहले उनके गांव से तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर बहती थी, जो अब महज सौ मीटर की दूरी पर है। एसडीएम धौरहरा धीरेंद्र सिंह ने बताया मथुरापुर, रैनीपुरवा, पसियनपुरवा, कैरतीपुरवा, तलियाघाट आदि में राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है।




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