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Chhattisgarh News गरियाबंद जिले के मैनपुर आदिवासी विकासखंड में सांप काटने से 7 साल के बच्चे की मौत हो गई।

रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़

गांव में पक्की सड़क नहीं होने के चलते एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी। इस वजह से बच्चे को समय रहते इलाज के लिए नहीं ले जाया जा सका। जब तक पिता अपने बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचा, तब तक रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी।जानकारी के मुताबिक, तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 36 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भुतबेड़ा के आश्रित ग्राम तेन्दुछापर में 7 साल का चंद्रहास नेताम अपने माता-पिता के साथ रहता था। वो ग्राम तेंदुछापर के शासकीय स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ता था। गुरुवार को चंद्रहास अपनी मां, पिता सीताराम नेताम और अन्य परिजनों के साथ जमीन पर सोया हुआ था। इसी दौरान उसे सांप ने काट लिया। इससे उसकी नींद खुल गई और उसने तुरंत अपने माता-पिता को जगाकर इसकी जानकारी दी। पिता और परिजन बाइक पर बच्चे के शव को लेकर गांव तक पहुंचे। पिता ने कमरे में देखा, तो वहां सांप नजर आया। उन्होंने सांप को पकड़कर मारा और बच्चे को लेकर गांव से लगभग 3 किलोमीटर दूर कच्चे दलदल पगडंडी वाले रास्ते से लेकर सड़क तक पहुंचे। मुख्य सड़क पर उन्हें एंबुलेंस मिली। कच्ची दलदली सड़क होने के चलते एंबुलेंस गांव के अंदर नहीं जा सकी थी। इसके बाद बच्चे को 108 संजीवनी एक्सप्रेस के माध्यम से मैनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था। पक्की सड़क नहीं होने के चलते गांव तक नहीं पहुंच पाई एंबुलेंस, मुख्य सड़क से परिजन बच्चे को लेकर एंबुलेंस में बैठे। पक्की सड़क नहीं होने के चलते गांव तक नहीं पहुंच पाई एंबुलेंस, मुख्य सड़क से परिजन बच्चे को लेकर एंबुलेंस में बैठे। इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई।

पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम के बाद शव को स्वास्थ्य विभाग ने मुक्तांजलि वाहन से गांव के लिए रवाना किया। हालांकि ग्राम तेंदुछापर तक पक्की सड़क नहीं होने के चलते भूतबेड़ा मुख्य मार्ग तक ही शव को मुक्तांजलि वाहन से पहुंचाया जा सका। इसके बाद पिता ने बाइक पर बच्चे के शव को रखा और घर तक पहुंचे। उदासीन जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों में भारी आक्रोश मैनपुर विकासखंड क्षेत्र के राजापडाव गौरगांव इलाके के ग्रामीण हमेशा पुल-पुलिया और सड़क की मांग को लेकर आंदोलन करते आए हैं, लेकिन आज तक उनकी मांगों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। कोई भी जनप्रतिनिधि आज तक भुतबेड़ा, गरीबा, गौरगांव जैसे गांवों का दौरा करने के लिए एक बार भी नहीं पहुंचे हैं। आला अधिकारी भी इस क्षेत्र में बहुत कम पहुंचते हैं, जिसके कारण यहां के लोग मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

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