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Uttar Pradesh News आसमान में दिखाई दिया सुपरमून बताया जाता है कि दुनिया भर में 1 अगस्त की रात को सुपरमून दिखाई दिया।

रिपोर्टर ऋषि ठाकुर बुलंदशहर उत्तर प्रदेश

एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नोल ने पहली बार 1979 में सुपरमुन शब्द का इस्तेमाल किया। बताया गया कि इस बार चंद्रमा का आकार सामान्य से 14 % अधिक दिखाई दिया। रात को 30% ज्यादा चमकीला भ दिखाई दिया। सुपरमून तब होता है जब चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी सब से कम हो जाती हैं। इस वजह से चांद ज्यादा बढ़ा और चमकीला दिखाई देता हैं। इस सुपरमून को देखने से ऐसा लगता है कि पृथ्वी के करीब आ रहा है। बता दें कि इस महीने 30 अगस्त को भी रात को सुपरमून होगा। जिसे ब्लू मून कहां जाता है। चांद को ब्लू मून तब कहते हैं। जब एक ही महीने में दो सुपरमून दिखाई देते हैं। आखरी बार दो सुपरमुन 1 साथ अगस्त के महीने में 2018 में नजर आए थे। सुपरमून एक ऐसी खगोलीय घटना है। जिसमे चांद अपने सामान्य आकार से ज्यादा बढ़ा दिखाई देता है। सुपरमून हर साल 3 से 4 बार देखा जाता है। सुपरमून देखने की वजह भी काफी अच्छा है। इस बार चांद धरती का चक्कर लगाते लगाते। उसकी कक्षा के बेहद करीब आ जाता है। इस स्थिति को पेरिजी कहा जाता है। चांद के धरती से दूर जाने पर उसे अपोजी कहते हैं।

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