राजस्थान

Rajasthan News लगातार तीन दिन तक चला देशी घी का अखंड भंडारा:- सतलोक आश्रम सोजत

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस का तीन दिवसीय समागम का आज 1 फरवरी को अंतिम दिन है,,

रिपोर्टर मीना देवी सोजत आश्रम राजस्थान।

“गरीब, काया काशी मन मघर, दुहूं कै मध्य कबीर।
काशी तजि मगहर गया, पाया नहीं शरीर”

विक्रमी संवत् 1575 (सन् 1518) महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी को कबीर साहेब जी हजारों लोगों के सामने सहशरीर सत्यलोक को चले गए उनका वहाँ शरीर भी नहीं मिला था।

कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस
यह परमात्मा की ही दया है कि भारत की धरती पर ऋषि, मुनि, गुरु, संत, अवतार और महापुरूषों का जन्म होता रहा है। इनमें से कई बड़े समाज सुधारक रहे, तो कईयों ने यहां व्याप्त पाखंड़ का कड़ा विरोध कर नया इतिहास रचा। इन्हीं महापुरुषों में एक नाम स्वयं परमेश्वर कबीर साहेब जी का भी है जिन्होंने समाज सुधार और लोगों का परोपकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कबीर साहेब जी सशरीर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए और बचपन से ही समाज में व्याप्त पाखंडवाद, आडंबरों और कुरीतियों का पुरज़ोर विरोध किया। जिसके कारण उस समय के हिंदू और मुस्लिम धर्म के ठेकेदार उनके दुश्मन बन गए और उन्होंने परमेश्वर कबीर जी को सैकड़ों यातनाएं भी दीं। लेकिन कबीर साहेब जी ने दोनों धर्मों में फैले पाखंड व आडंबरों का खुलकर विरोध किया। साथ ही उन्होंने जातिवाद, धार्मिक भेदभाव, ऊंच-नीच पर भी करारा प्रहार करते हुए प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। अपने परोपकार और समाज सुधार के कार्यों के कारण ही उन्हें आज भी एक सबसे बड़े समाज सुधारक और विचारक के रूप में जाना जाता है। लेकिन वास्तविकता तो यह है कि कबीर साहेब जी स्वयं ही पूर्णब्रह्म परमात्मा थे और हैं। परमेश्वर कबीर जी के 505वें निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य पर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में 30, 31 जनवरी व 1 फरवरी, 2023 को राजस्थान के पाली जिले में स्थित उनके सतलोक आश्रम सोजत में तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका समापन आज 1 फरवरी को हो रहा है आइये कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस के अवसर पर हम जानते हैं कि ब्राह्मणों द्वारा फैलाए झूठ, पाखंड और अंधविश्वास का कबीर जी ने कैसे पर्दाफाश किया तथा जातिवाद, साम्प्रदायिकता व अन्य कुरीतियों को किस तरह समाप्त किया?

और शास्त्रविधि अनुसार साधना करने वाला चाहे काशी मरो, चाहे मगहर, वह अपनी साधना अनुसार ऊपर के लोकों में स्वर्ग का सुख प्राप्त करेगा। इसके विपरित अर्थात् शास्त्र विरुद्ध साधना करने वाला व पाप करने वाला सीधा नरक जाएगा या गधा बनेगा, चाहे वह मगहर मरे, चाहे काशी। अपने इन्हीं वचनों को सत्य प्रमाणित करने के लिए काशी (बनारस) शहर में 120 वर्ष लीला करके कबीर परमात्मा ने पंडितों, ब्राह्मणों तथा काज़ी-मुल्लाओं से कहा कि “मैं मगहर स्थान पर मरूँगा और स्वर्ग, महास्वर्ग (ब्रह्मलोक) से भी ऊपर शाश्वत स्थान सतलोक में जाऊँगा। आप (पंडितजन) अपना-अपना पतरा-पोथी ज्योतिष साथ ले चलना तथा देखना कि मैं कबीर कहाँ जा रहा हूँ?” और विक्रमी संवत् 1575 (सन् 1518) महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी को कबीर साहेब जी हजारों लोगों के सामने सहशरीर सत्यलोक को चले गए उनका वहाँ शरीर भी नहीं मिला था।

संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में कबीर परमेश्वर के निर्वाण दिवस पर सतलोक आश्रम सोजत में निम्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया 30, 31 जनवरी व 1 फरवरी

1.तीन दिवसीय अखंड पाठ,
2 तीन दिवसीय अखंड भंडारा,
भंडारे में बूंदी देशी घी का भंडारा हुआ,
3.रक्तदान शिविर,
4.दहेज मुक्त रमैनी विवाह
5.निःशुल्क नाम दीक्षा।
हजारों श्रद्धालु पहुंचे सोजत आश्रम ।।

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