Madhya Pradesh News आखिर यह गांव आलाखेड़ा क्यों बना तारों वाला शहर देखिए पूरी खबर।

रिपोर्टर डॉ रघुवीर सिंह राजपूत उज्जैन मध्य प्रदेश
उज्जैन जिले के महिदपुर, झारड़ा तहसील का गांव आलाखेड़ा क्यों बना तारों वाला शहर । हां ग्राम आलाखेड़ा के विषय में अगर आप देखेंगे तो आपको भी पता चलेगा कि यह गांव तारों वाला शहर कैसे बना। ग्राम आला खेड़ा में अगर आप देखेंगे तो पूरे गांव में तार ही तार दिखेंगे । क्योंकि यहां पर बिजली ट्रांसफॉर्मर से ग्रामीण जन के घर, घर तक जो बिजली केवल की व्यवस्था होनी चाहिए ,वह व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। यहां के गांव वालों ने कई बार बिजली विभाग को सूचना दी की हमें ट्रांसफर से घर तक बिजली की केबल उपलब्ध करा दो। फिर भी बिजली विभाग ने इस पर कोई सुनवाई नहीं करी।
यहां के ग्रामीण जन बहुत परेशान होते हैं। अब इनके लिए यह जरूरी समझो या मजबूरी क्योंकि बिल तो भरते ही हैं ।
परंतु बिजली उपलब्ध नहीं हो पाती ,इनको मजबूरन अपने, अपने हिसाब से ट्रांसफॉर्म से तार द्वारा अपने घर पर बिजली ले जाना पढ़ रहा है। यही मेन कारण रहा है। कि यह ,गांव आला खेड़ा तारों वाला शहर बन गया । वैसे यह देखा जाए तो खतरों से खाली नहीं है। भगवान ना करे अगर कोई हादसा होता है तो इसका जवाब दार कौन होगा। परंतु ग्रामीण जन क्या करें विद्युत विभाग सुनवाई ही नहीं लेता है। इसी कारण एक हादसा भी हुआ। 16 जुलाई रविवार को यहां पर मेन रोड स्कूल ,पंचायत और रामदेवरा की तरफ जाने वाले मेन चौराहे पर एक भैंस करंट लगने की वजह से मर गई ।
इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारी खटीक घोंसला से ग्राम आलाखेड़ा अपनी पूरी टीम के साथ पहुंचे और पूरे गांव में घूम फिर कर सभी ट्रांसफॉर्म का सर्वे किया। कुछ बोल टूटने की पोजीशन में है ,यहां तक कि एक बिजली का पोल टूटने की स्थिति में होने के कारण गांव वालों ने उसे एक नीम के पेड़ से बांध रखा है। पूरा गांव बिजली की केवल ना मिलने की वजह से तारोवाला शहर बन गया है । बिजली विभाग के अधिकारी ने गांव वालों को आश्वासन दिया है। और कहा है कि आपके गांव आलाखेड़ा में हम कोशिश कर कर के ट्रांसफॉर्मर से घर घर बिजली केवल की व्यवस्था करेंगे। जिससे आपके ही गांव के और भी मकान है जो गांव से कुछ दूरी रामदेवरा पर हैं । वहां पर आए दिन बिजली नहीं पहुंच पाती हैं, जिस कारण वह अंधेरे में रहते हैं। उनकी समस्या भी जल्दी से जल्दी हम हल करेंगे। अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि हां यह गांव वालों की मजबूरी है । कि केवल उपलब्ध ना होने के कारण ट्रांसफॉर्मर से तार डालकर वह अपने अंधेरे घर में उजाला करते हैं । और बिजली विभाग की यह कमजोरी हैं । इसी कारण गांव के लोग खतरों से खेल रहे हैं । अब देखना यह है कि यह गांव आलाखेड़ा जो तारो वाला शहर बन कर सामने आया है । इसमें बिजली की केवल कब प्राप्त होती हैं। और कब विद्युत विभाग इन्हें खतरों से सुरक्षित करता है । गांव वाले और कुछ कर भी क्या कर सकते हैं। उन्होंने तो कई बार आवेदन दिए ।और अधिकारियों को भी बुला कर यह स्थिति बता दी है। इसके बाद की जवाबदारी विद्युत विभाग की ही हैं। अब जो कुछ करना है वह विद्युत विभाग ही करेगा।

Subscribe to my channel