IC News and Media House Private Limited


ब्रेकिंग न्यूज़राज्यहरियाणा

Haryana News शोध-प्रविधि के पालन तथा शोध और समीक्षा के समन्वय से ही संभव है स्तरीय शोधकार्य- डॉ रामनिवास ‘मानव’

रिपोर्टर सतीश नारनौल हरियाण

जीवन हो या साहित्य, दोनों के लिए जरूरी है शोध। शोध के बिना दोनों का सम्पूर्ण विकास संभव नहीं। यह कहना है वरिष्ठ साहित्यकार और सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) में हिंदी-विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ रामनिवास ‘मानव’ का। विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी के शोधार्थियों के लिए आयोजित कोर्स वर्क कार्यक्रम में ‘शोध और समीक्षा : प्रविधि, महत्त्व एवं उपादेयता’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि शोध से जहां नवीन तथ्य उद्घाटित होते हैं, वहां समीक्षा हमें उन तथ्यों के सम्यक् मूल्यांकन का अवसर प्रदान करती है। डॉ ‘मानव’ ने स्पष्ट किया कि उच्च स्तरीय शोध के लिए शोध-प्रविधि के पूर्णतः पालन के साथ सही विषय-चयन और उचित मार्गदर्शन तो आवश्यक है ही, शोध और समीक्षा में समुचित समन्वय भी जरूरी है। पीएचडी उपाधि को सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति से जोड़ने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व निर्णय को शोध के स्तर में आई गिरावट का मुख्य कारण बताते हुए डॉ ‘मानव’ ने स्पष्ट किया कि सर्विस पाने के लिए शोधार्थी ऐन-केन-प्रकारेण पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने में जुट गये, शोधकार्य की महत्ता और गुणवत्ता गौण हो गई। यही कारण है

कि यूजीसी ने अब सर्विस के लिए पीएचडी की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। यूजीसी के निर्णय की सराहना करते हुए डॉ ‘मानव’ ने आशा प्रकट की कि अब परिश्रमी और प्रतिभाशाली छात्र ही शोधकार्य में प्रवृत्त होंगे। उन्होंने शोधार्थी और शोध-निर्देशक ‌के बीच समुचित सामंजस्य को भी जरूरी बताया, क्योंकि इसके बिना श्रेष्ठ और स्तरीय शोधकार्य संभव नहीं है। ज्ञातव्य है कि तीन सप्ताह तक चलने वाले इस कोर्स वर्क कार्यक्रम में हरियाणा, दिल्ली, बिहार, गुजरात, कर्नाटक और केरल सहित आधा दर्जन प्रदेशों और कुनो‌ (नाइजीरिया) के शोधार्थी सहभागिता कर रहे हैं। इस अवसर पर कुलपति डॉ उमाशंकर यादव, कुलसचिव इमरान हाशमी, शोध-अधिष्ठाता डॉ सुमेर सिंह और प्रोफेसर डाॅ योगेश कुमार की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

ChatGPT Image Jun 19, 2026, 03_57_34 PM

Related Articles

Back to top button