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Madhya Pradesh News सीहोर पशुपालन के क्षेत्र में किसानों के लिए संभावनाओं पर कार्यशाला आयोजित

किसी भी व्यवसाय को प्रारंभ करने से पहले अच्छी योजना बनाना जरूरी है-कलेक्टर

✍️रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन जिला सीहोर मध्यप्रदेश

किसी भी व्यवसाय को प्रारंभ करने के लिए उस व्यवसाय से जुड़े सभी घटकों और भौगोलिक स्थिति का सर्वे आवश्यक है। सर्वे से प्राप्त डाटा जितना शुद्ध होगा, व्यवसाय की प्लानिंग उतनी ही बेहतर बनेगी। यह बात कलेक्टर प्रवीण सिंह ने जिला प्रशासन तथा सीआईआई द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में किसानों के लिए संभावनाओं पर आयोजित कार्यशाला में कही। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के दो जिलों सीहोर और जबलपुर को डेयरी विकास के लिए पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है।

कार्यशाला में कलेक्टर सिंह ने कहा कि यदि डाटा सही नहीं होगा, तो व्यवसाय के लिए बनाया गया प्लान भी सही नहीं बनेगा। सही प्लान के अभाव में व्यवसाय को सफल बनाना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सीहोर में डेयरी व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। यह व्यवसाय प्रारंभ करने से पहले जिले की दुधारू पशुओं, पशुपालकों, पशुपालकों की रूचि, वर्तमान में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण की स्थिति, चिलिंग प्लांट, मिल्क रूट, मिल्क प्रोडक्ट तथा उनके विक्रय वाले स्थानों, रूटों आदि का गहन सर्वे कर कार्य योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि सीहोर भोपाल के निकट होने के कारण भोपाल की मिल्क प्रोडक्ट की ज्यादा से ज्यादा मांग को पूरा कर सकता है। इसलिए यहां डेयरी विकास की ज्यादा संभावनाएं हैं। कलेक्टर ने जिले में स्व सहायता समूह द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि सीहोर ने बैंक लिंकेज का शत-प्रतिशत टारगेट पूरा कर लिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और स्व सहायता समूह की दीदीयो को इस कार्यशाला में दुग्ध उत्पादन से जुड़ी पूरी जानकारी लेने तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान करने के लिए कहा। कार्यशाला में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्ष सिंह ने पॉयलेट प्रॉजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में सीआईआई से श्री रितोजा वासु, प्रज्ञा नेहरू, बीसीजी से रिया गुप्ता, अक्षय गुप्ता सहित अनेक विभागों के अधिकारी, सीआईआई के प्रतिनिधि तथा जिले के डेयरी पार्टनर के प्रतिनिधि उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि डेयरी एक्सिलेटर का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में उत्‍पादित दुग्‍ध में वृद्धि कर किसानो को अधिक से अधिक दुग्‍ध का मूल्‍य दिलवाना है। इस कार्य मे जिले की महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के माध्‍यम से ग्रामो मे वीएमसी लगवाये जाएंगे।

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