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Madhya Pradesh News जेल में निरुद्ध एक कैदी की मौत के बाद परिजनों एवं समाज के लोगों ने सड़क पर शव रखकर चक्काजाम किया।

रिपोर्टर शैलेन्द्र जैन दमोह मध्य प्रदेश

 
दमोह    परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए शिवराज सरकार के विरुद्ध नारे लगाए। 307 की सजा काट रहे एक कैदी की जेल में मौत हो जाने के बाद परिजनों एवं समाज का गुस्सा प्रशासन के विरुद्ध फूट पड़ा। शव परीक्षण के बाद परिजनों ने अस्पताल चौराहे पर शव रखकर न केवल धरना दिया बल्कि चक्का जाम कर सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। दरअसल देहात थाना अंतर्गत ग्राम मंगोलिया निवासी तोताराम पुत्र दशरथ काछी की कस्टोडियल मौत हो गई थी। जेल प्रशासन ने मौत का कारण दिल का दौरा पड़ना बताया है। लेकिन परिजन इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है। मृतक के साथ 6 अन्य परिजन भी जेल में सजा काट रहे हैं। चूंकि मृतक और उसके अन्य परिजनों को कारावास के साथ 40 हज़ार रुपए का अर्थदंड भी भरना था, लेकिन अर्थदंड न भर पाने के कारण उन्हें तीन 3 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगताया जा रहा है। इसी दरमियान तोताराम काछी की मौत हो गई। परिजनों को समझाइश देने पहुंचे तहसीलदार मोहित जैन एवं देहात थाना प्रभारी सत्येंद्र सिंह राजपूत की भी परिजनों ने नहीं सुनी। सरकार और विधायक के खिलाफ नारेबाजी करीब 43 डिग्री तापमान के बीच परिजन एवं समाज के लोग सड़क पर बैठे रहे और छोटे-छोटे बच्चे हाथ से हाथ पकड़ कर चक्का जाम करवाते रहे। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने शिवराज सरकार, पुलिस प्रशासन एवं दमोह विधायक अजय टंडन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। प्रदर्शनकारी समाज के नेता योगेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया कि यह सामान्य मृत्यु नहीं है यह हत्या है जेल प्रशासन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना चाहिए। जेल प्रशासन ने मांगे 10 हज़ार रुपए मृतक के बेटे पवन ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि उसके पिता 5- 6 दिन से बीमार थे। लेकिन जब वह दवा लेकर जाता था तो उसके पिता से उसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। न उनका जेल के डॉक्टर या अस्पताल में उपचार कराया जा रहा था। जिसके कारण उनकी मौत हो गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि जेल में पदस्थ संतरी हसन खान एवं परवेज खान 10 हज़ार रुपए की लगातार मांग कर रहे थे। रुपए न दिए जाने के कारण उनके पिता का इलाज भी नहीं कराया गया। बल्कि मौत की सूचना जेल प्रशासन ने तब दी जब सारी कार्रवाई कर ली गई और शव परीक्षण करा लिया गया। पीड़ित का कहना है कि शासन-प्रशासन आकर उनकी बात सुने। 7 लोग जेल में बंद हैं पिताजी खत्म हो चुके हैं। छोटे-छोटे बच्चे हैं उनके भरण-पोषण की समस्या है। इसलिए उनके लिए मुआवजा दिया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। न्यायिक जांच हो रही है तहसीलदार मोहित जैन का कहना है कि पीएम हो चुका है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मामले की जांच कर रहे हैं। पीएम रिपोर्ट आएगी उसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ पाएगी। जहां तक इनकी मांग का सवाल है तो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से बड़ी और क्या जांच हो सकती है?

 

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