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Madhya Pradesh News जिला उमरिया.भ्रष्टाचार स्कूल ड्रेस सिलाई में भारी भ्रष्टाचार स्कूल ड्रेस सिलाई में भारी भ्रष्टाचार कर रहे हैं

 रिपोर्टर कंचन साहू उमरिया मध्य प्रदेश

आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकारों के द्वारा हर तरह की कार्य योजना बनाई जा रही है इसी के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को गणवेश की सिलाई का काम दिया गया है। लेकिन इसमें भी भ्रष्टाचार के दीमक ने पोल कर दिया। यहां पर गणवेश की सिलाई में जो कपड़ा दिया गया वह गुणवत्ता के मापदंडों पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। स्वसहायता समूह की महिलाओं ने कुछ और ही कहानी बताया तो जिले के परियोजना अधिकारी कुछ और बयान दे रहे हैं, वहीं जिला पंचायत की सीईओ कुछ और ही बता रही हैं।

उमरिया  जिले के करकेली ब्लाक के अंतर्गत ग्राम भरौला में स्व सहायता समूह के द्वारा सामुदायिक भवन में गणवेश सिलने का कार्य किया जा रहा है, इसी दौरान सामुदायिक भवन की बिजली काट दी गई तो महिलाओं के द्वारा पेड़ के नीचे सिलाई मशीन रखकर गणवेश की सिलाई की जा रही थी। इस बात की जानकारी मीडिया को मिली, कि स्वसहायता की महिलाएं पेड़ के नीचे गणवेश सिलने का कार्य कर रही हैं तो जब ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए मीडिया कर्मी स्थल पर पहुंचे तो देखा कि दिन में बिजली के पोल में लगा हैलोजन जल रहा है मगर समुदायिक भवन की लाइट कटी हुई थी जिस कारण महिलाएं पेड़ के नीचे सिलाई कर रही थी उसी दौरान देखा गया कि जिस गणवेश को‌ कक्षा एक से पांच तक के बच्चे और कक्षा 6 से 7 तक के बच्चे पहनेंगे, उस कपड़े की क्वालिटी एकदम घटिया स्तर की है जिसको लेकर सवालिया निशान खड़ा हुआ तो पोल खुल कर सामने आ गई। स्वसहायता समूह की अध्यक्ष नीलम बैगा बताई कि जिले के ही कुछ अधिकारी कपड़ा व्यवसायियों से मिलकर इस गणवेश के कपड़े में भ्रष्टाचार कर रहे हैं हालांकि स्व सहायता समूह की महिला ने मीडिया कर्मियों को बताया कि लाइट तो 3 दिनो से कटी हुई है जिस कारण से हम पेड़ के नीचे बैठकर सिलाई कर रहे हैं और सिलाई की इस कमाई से हमारा घर परिवार नहीं चल पा रहा है। वही गणवेश के कपडे में जिला पंचायत के मनीष सर झांसी के कपड़े वाले को लेकर आये थे और बोले कि कपड़ा इन्ही से लेना है। इस मामले के आजीविका मिशन के ईमानदार जिला परियोजना प्रबंधक प्रमोद शुक्ला से बात किया गया तो मीडिया को सामने देख किस तरह गड़बड़ा गए, कहने लगे कि जिले में 54 सिलाई सेंटर संचालित हैं जिसमे 300 स्वसहायता समूह की 1100 महिलाएं कार्य कर रही हैं।

15 से 20 जून तक सिलाई कार्य पूर्ण कर लें और 30 जुलाई से 20 जून तक बच्चों को गणवेश उपलब्ध करा दिया जाय। वहीं बिजली कट होने के मामले में कहे कि बिजली विभाग का कैम्प लगा था तो उन्होंने काट दिया हमने सचिव को बोला है कि जल्दी कनेक्शन जुडवा दें। वही जब इस मामले को लेकर जिला पंचायत की ईमानदार और सहृदय सीईओ इला तिवारी के पास पहुंचे तो उनका कहना है कि समूह जहां से चाहे वहां से कपड़े लेकर काम कर सकता है रही बात क्वॉलिटी की तो क्वालिटी की जांच के बाद ही पेमेंट किए जाएंगे, और उनको जो शासन से निर्धारित दर है उतनी ही सिलाई दी जा रही है भरौला में लाइट की समस्या रही है, सचिव को निर्देश दे दिए गए हैं लाईट चालू हो जाएगी। गौरतलब है कि आजीविका मिशन के तहत जिले भर में करीब 11 सौ महिलाएं सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए ड्रेस को बनाने का काम रही हैं, जिसमें करीब 3 करोड़ रुपये का काम होना हैं, लेकिन जिले के अधिकारियों ने मनमानी करते हुए अपने चहेते वेंडरों को कपड़ा सप्लाई का काम दे दिया है, जिससे समूह कोसों दूर है, बहरहाल खराब कपड़े को लेकर उठे इस ज्वलंत मुद्दे पर दो अधिकारियों के अलग-अलग बयान क्या साबित करते हैं।जहां जिले में किसी मनीष नाम के कर्मचारी के साथ मिल कर आजीविका मिशन खेल कर रहा है और सीईओ जिला पंचायत को झूठी जानकारी देकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, जबकि सीईओ जिला पंचायत ने साफ शब्दों में नियम के आधार पर कार्य होना बताया है। ऐसे में आजीविका मिशन कटघरे में नजर आ रहा है। इस मामले पर निष्पक्ष जांच करवा कर कार्रवाई की आवश्यकता है। ऐसा नही है कि यह कोई पहली बार हो रहा है यह खेल वर्षों से चल रहा है और प्रदेश के बाहर के लोगों के नाम पर कुछ कद्दावर लोग अधिकारियों से मिल कर अपने चहेतों से घटिया किस्म का कपड़ा सप्लाई करवा कर स्वसहायता समूहों पर दबाब बना कर खेल खेलते है, प्रदेश के ईमानदार मुख्यमंत्री के राज्य में यह एक बड़ा भ्रष्टाचार है जो हर जिले में होता होगा। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, कम से कम मामा के भांजे भंजियो को तो बख्श दिया जाय.

ChatGPT Image Jun 19, 2026, 03_57_34 PM

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