Rajasthan News पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को को बांदीकुई में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना

रिपोर्टर सुमित कुमार बैरवा दौसा राजस्थान
ERCP किसान संघर्ष समिति के तत्वाधान में एडवोकेट विनेश कुमार वर्मा मनोनीत पार्षद प्रदेश महासचिव ने सौंपा ज्ञापन
इस योजना को राष्ट्रीय योजना लागू करने और डीपीआर में संशोधन के लिए मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम उपखंड अधिकारी बांदीकुई नीरज मीणा को ज्ञापन सौंपा ज्ञापन में बताया कि उपरोक्त संदर्भ में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं बांदीकुई क्षेत्र सहित राजस्थान के 13 जिलों की जनता आपके द्वारा किए गए वादे के अनुरूप जनसभा के संबोधन में पूर्वी राजस्थान के करीब 4 करोड़ लोगों के लिए उनके बंजर हुए खेतों में किसानों के लिए सौगात के रूप में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना की घोषणा की गई थी जिस पर जनता ने अपना फर्ज निभा कर राजस्थान से 25 सांसद संसद को दिए लेकिन आप की घोषणा के 4 साल बाद ही परियोजना को मंजूरी नहीं दी गई जिससे यहां के लोग अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं राजस्थान की जनता घोषणा में नहीं वादे में नहीं परिणाम में विश्वास करती है यह कैसी विडंबना है देश के प्रधानमंत्री के उद्बोधन में की गई घोषणा क्रियान्वित ना होने के कारण जनता के हाथ खाली है पूर्वी राजस्थान में पानी की हालत इस कदर बिगड़े हुए हैं जिसको शब्दों में बयां करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा है किसानों के खेत बंजर होने , हलक तर करने के लिए पानी पर्याप्त नहीं है राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने बजट 2018 में घोषणा की थी अब वर्तमान में मुख्यमंत्री श्रीमान अशोक गहलोत जी योजनाओं को बार बार हर बार राष्ट्रीय परियोजना की घोषणा करने के लिए आपका ध्यान आकर्षित करते आ रहे हैं ।
वर्मा ने बताया कि इस योजना से पूर्वी राजस्थान में करीब 4 करोड़ लोगों के लिए उनके बंजर व खेतों में किसानों के लिए को सौगात के रूप में एक जीवनदायिनी सिद्ध होगी इस परियोजना से राज्य के 13 जिले सवाई माधोपुर ,दौसा ,करौली, धौलपुर, भरतपुर, अलवर, जयपुर ग्रामीण ,टोंक ,बूंदी ,कोटा, झालावाड़, बारा ,अजमेर को लाभ मिलेगा जिससे करीब 210000 हेक्टेयर भूमि की अतिरिक्त सिंचाई होगी पूर्वी राजस्थान भौगोलिक दृष्टि से बहुत बड़ा भाग मरुस्थलीय है प्रदेश का 1400 किलोमीटर का अंतरराष्ट्रीय पार्क भारत सीमा है प्रदेश में 12 माह बहने वाली एकमात्र नदी चंबल है जिसका अधिकांश वर्षा जल भरकर बेकार चला जाता है इस परियोजना के जरिए प्रदेश के बड़े बड़े भूभाग में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध होगा उक्त परियोजना में दौसा जिले के साथ रेडियो बांध, देवती, सुरेर, मल्लाना, विजय सागर ,तेली घाटी, बढ़िया खुर्द बांध , सावा नदी, जाटोलीबांध, उपरेड़ा बांध आजमगढ़ बांध, बसवा बांध कालोंका बांध, माधव सागर बांध, मोरल , जमवारामगढ़ ,बाढ़गंगा और सावा नदी को डीपीआर में शामिल करने के लिए अति शीघ्र कार्रवाई करें राष्ट्रीय परियोजना बनाने के मुख्य कारण इससे 13 जिलों को लाभ मिलेगा प्रदेश की 40% जनसंख्या को का लाभ मिलेगा इस परियोजना से राज्य के निवेश एवं राजस्व में वृद्धि होगी इस परियोजना से पशु धन में वृद्धि होगी जिससे क्षेत्र की दशा व दिशा सुधरेगी इस परियोजना दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर स्थाई जल स्रोतों को बढ़ावा मिलेगा जिससे प्रदेश में उद्योग विकसित करने में मदद मिलेगी राजस्थान के 295 ब्लॉक में से लगभग 245 ब्लॉक सुखा क्षेत्र हैं यह उनके लिए भी जीवनदायिनी होगी साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई का सपना था नदियों से नदियों को जोड़ने का इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना मनाने से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकेगी। क्षेत्र में पानी की समस्या से लोग लंबे समय से परेशान हैं। गांव में भी पानी की कमी होने के कारण खेती बाड़ी का कार्य ठीक प्रकार से नही हो रहा। ऐसे में इस योजना को सरकार को लागू करना चाहिए। जिससे क्षेत्र के लोगों को पेयजल मिल सके।

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