गुजरात

गुजरात गांधीनगर दहेगाम 400/220 पावर ग्रिड स्टेशन में भूतपूर्व सैनिक के साथ अन्याय।

बिना कोई नोटिस दिए कीये गये नोकरी से बर्खास्त

रिपोर्ट नागजी भाई बारोट गांधीनगर गुजरात

गुजरात गांधी नगर जिले के दहेगाम तहसील में गणेशपुरा के पास 400/220 पावर ग्रिड स्टेशन स्थित है। कानून कहता है कि अगर किसी व्यक्ति को नौकरी से बर्खास्त करना चाहते है तो एक महीने पहले नोटिस दिया जाना चाहिए ताकि वह कहीं और नौकरी पा सके। लेकिन पावर ग्रिड स्टेशन में यह कानून लागू नहीं होता है। अब इस पावर ग्रिड की सिक्योरिटी की कमान एक नई सुरक्षा एजेंसी ने संभाल ली है उसका कहने का मतलब यह है कि ये नियम हम पर लागू नहीं होते हैं। हमारी कंपनी गन मैन के ठिकाने पर रिवाल्वर या पिस्टल नहीं रखती है.क्योंकि उन्हें गन नहीं माना जाता है।

पहले वाले सिक्योरिटी कॉन्टैक्टर पागल थे जो पिस्टल और रिवाल्वर को 8 से 9 साल से गन समज के फौजियों को नौकरी पर रखते थे। इसका मतलब है कि कहीं न कहीं भ्रष्टाचार हो रहा है। अब आरटीआई व कोर्ट के माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वाले बर्खास्त सिपाही ओ भूतपूर्व सैनिक संगठन द्वारा सुरक्षा ठेकेदार की भी जांच कराई जाएगी और पावर ग्रिड कर्मियों से भी यह भी चेक किया जाएगा कि नई आई सुरक्षा एजेंसी को फायर करने का आदेश ऊपर से मिला है या नहीं, हालांकि रिवाल्वर या पिस्टल तो बंदूक समझ में नहीं आती, फिर ऊपर बैठा अधिकारी गन लाइसेंस क्यों लिखता है। आरटीआई के माध्यम से यह भी पता लगाया जाएगा कि पावर स्टेशन में कितने कांटेक्ट चल रहे है गाड़ियां कहां कहां ड्यूटी कर रही है कितने किलोमीटर दूरी कर रही है और कौन-कौन सी जगह पर ड्यूटी कर रही है। भारत सरकार लिखी हुई गाड़ियां किस किसको लागू है कांट्रेक्ट किसका है , तनखा कौन सी दिनांक को होनी चाहिए और कौन सी दिनांक को हो रही थी ऐसे कई सवाल है जो शंका का स्पद लेते हैं। दहेगाम भूतपूर्व सैनिक संगठन पहले निकाल दिए गए फौजियों को भी न्याय दिलाने के लिए पीछे कदम नहीं लेंगे क्योंकि डी,जी,आर पॉइंट स्थानिक लोगों के लिए मर्यादित होता है। लेकिन ठेकेदार बाहर के लोगों को जो अपने राज्य के हैं उनको लाने की कोशिश करता है और पावर ग्रिड के अधिकारियों से मिली जुली भगत बनाकर स्थानिकभूतपूर्व सैनिकों को निकाल के अपने राजस्थान और यूपी के लोगों को ड्यूटी लगाने की कोशिश करता है। आगे एजेंसी द्वारा कहां-कहां कंपनियां उसकी चल रही है कहां पर इनका ठेका है कितने आदमी इसके अंदर काम करते हैं। और कितने फौजी और कितने सिविलयस इसने अपने अंदर में रखे पूरी माहिती आरटीआई द्वारा मांगी जाएगी पीके हमेशा देखने को मिल रहा है कि कॉन्ट्रैक्ट पद्धति में हमेशा फौजियों को ही घाटा होता है इसीलिए आंदोलन भी चलते रहते हैं अगर इसने सही जवाब नहीं दिया तो गांधीजी ने मार्ग पर देहगाम भूतपूर्व सैनिक संगठन कदम उठाएगा

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