
रिपोर्टर विवेक तिवारी वैशाली बिहार
वैशाली : जन सुराज पदयात्रा के 207वें दिन की शुरुआत वैशाली के पातेपुर प्रखंड अंतर्गत हरिलोचनपुर सुक्की पंचायत स्थित पदयात्रा शिविर में सर्वधर्म प्रार्थना से हुई। उसके बाद प्रशांत किशोर ने स्थानीय पत्रकारों के साथ संवाद किया। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने अपने पदयात्रा का अनुभव साझा किया। जन सुराज पदयात्रा के माध्यम से प्रशांत किशोर 2 अक्तूबर 2022 से लगातार बिहार के गांवों का दौरा कर रहे हैं। उनकी पदयात्रा अबतक लगभग 2500 किमी से अधिक की दूरी तय कर चुकी है। पश्चिम चंपारण से शुरू हुई पदयात्रा शिवहर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण होते हुए वैशाली जिले पहुंची है। वैशाली में पदयात्रा अभी 15 से 20 दिन और चलेगी और इस दौरान अलग-अलग गांवों और प्रखंडों से गुजरेगी।
बिहार के हर गांव से 40 से 50 प्रतिशत युवा रोजगार या शिक्षा के लिए पलायन करने को मजबूर हैं
वही मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि, बेरोजगारी और पलायन बिहार की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इस समस्या को समझने के लिए आपको बिहार में पदयात्रा करने की जरूरत नहीं है। पदयात्रा की वजह से इस समस्या की विकरालता का पता चला है। बिहार के ज़्यादातर गांव में 40 से 50 प्रतिशत युवा गांव में नहीं हैं। गांव में बच्चे, बूढ़े और महिलाएं ही नज़र आते हैं। पलायन की समस्या को लोग गरीबों की समस्या मानते हैं, लेकिन पलायन से जितना प्रभावित ग़रीब समुदाय है उतना ही प्रभावित आर्थिक रूप से समृद्धि समुदाय भी है। ग़रीब व्यक्ति तो रोज़गार के लिए बाहर जा रहा है, लेकिन आर्थिक रूप से समृद्धि परिवार के बच्चे भी बिहार में सुविधा के अभाव में पढ़ाई और अच्छी नौकरी के लिए बाहर जा रहे हैं। बिहार ने परिवार की मूल अवधारणा को लगभग ख़त्म कर दिया है। गांव में शायद ही कोई ऐसा परिवार है जहां बच्चे अपने माता पिता के साथ रहते हैं।




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