Uttar Pradesh News क्षेत्र के पाली खुर्द गांव में आयोजित सत्संग समारोह में महापुरुष बाबा जयगुरुदेव महाराज के उत्तराधिकारी एव जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के अध्यक्ष पंकज महाराज द्वारा प्रवचन दिए गए।
सत्संग में सैकड़ो अनुयायी मौजूद रहे।

ब्यूरो चीफ सागर कुमार इटावा उत्तर प्रदेश
सत्संग में पंकजजी महाराज ने कहा यह सत्संग है यहां किसी व्यक्ति धर्म या जाति बिरादरी की निंदा आलोचना नहीं की जाती बल्कि प्रभु भक्ति के प्रति शौक पैदा किया जाता है।”‘सत्संग जल जो कोई पावे मैलाई सब कटि कटि जाए” सत्संग है कोई कथा कीर्तन नहीं यह महात्माओं की अजर अमर वाणिया है।यदि आने ध्यान से इसे सुन लिया तो निश्चित ही आपको मानव जीवन के उद्देश्य के बारे पता चल जाएगा की आखिर हमें मानव शरीर किसलिए मिला है।उन्होंने कहा कि यह मानस शरीर तुम्हें पिछले जन्मों के पुण्य कर्मों व महात्माओं की दया से मिला है।जब हम लोग इस संसार में पैदा हुये तो कोई जाति बिरादरी लेके नहीं आये। न ही कोई कौम, मजहब लेके आये, न अपना नाम लेके आये। सिर्फ नंगे रोते हुये हम लोग इस संसार में पैदा हुये। धीरे-धीरे हमारा फैलाव दुनियां में होता चला गया। हमने कुटुम्ब परिवार जमीन जायदाद बना लिये लेकिन जब जाने का वक्त आया तो आपको यहां से खाली हाथ भेज दिया गया। न आपके साथ नाम गया, न आपकी जमीन जायदाद गई, सब कुछ आपका उसी श्मशान घाट पर जलकर खाक हो गया। पलक झपकते ही ऊपर धर्म राज की कचहरी में, अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब किताब हो जायेगा। धर्मराज तुमको सजा सुना देंगे। ले जाओ इनको फला नाम के नर्क में डाल दो। वहां पर तुम्हारी मदद कौन करेगा। वहां तो नाना प्रकार के नर्क बनें हैं जहां जीवों को उनके कर्मों की सजा भोगनी पड़ती है।
महात्माओं ने जब साधना करके अपनी तीसरी आंख से वहां के भयानक दृश्य को देखा तो हमारे आपके लिये लिख दिया कि ‘‘लौह के खम्भ तपत के मांही जहां जीव को ले चिपटाहीं।’’ वहां लोहे से लाल खम्भों में जीव चिपटाये जाते हैं। हाय-हाय करके चिल्लाते हैं, लाखों मील तक उनकी रोने की आवाज जाती है। लेकिन उनकी चीख पुकार को सुनने वाला कोई नहीं। इसलिये महात्मा समझाते हैं यह शरीर भजन करनेे के लिये मिला है। घर गृहस्थी में रहते हुये खेती दुकान दफ्तर का काम मेहनत ईमानदारी से करते हुये सुबह शाम घण्टे दो घण्टे समय निकालकर किसी मर्मभेदी महात्मा से भजन का रास्ता लेकर सुरत शब्द योग की कमाई कर लो जिसके लिये ये मानव तन मिला है। हमारे गुरु महाराज परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अपने 116 वर्ष की आयु तक करोड़ों लोगों को इसी नाम योग साधना को सिखाकर दया कृपा देकर जीवन बदल दिया। महाराज जी ने जीते जी प्रभु प्राप्ति की सरल सुगम नाम योग साधना सुमिरन, ध्यान, भजन की विधि को विस्तार से समझाकर बिना नागा नित्य प्रति करने की जोरदार अपील भी किया। उन्होंने आगामी 17 से 21 मई तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में होने वाले अपने गुरु महाराज परम संत बाबा जयगुरुदेव जी के ग्यारहवें पावन भण्डारा पर्व पर पधारने का निमन्त्रण दिया तथा बताया कि मथुरा में वरदानी जयगुरुदेव मन्दिर बना है जहां बुराईयां चढ़ाने पर मनोकामना की पूर्ति होती है। जिला-इटावा में तह. भरथना के गांव खितौरा धाम में बाबा जी की पावन जन्मभूमि है यहां पर भी भव्य वरदानी मन्दिर बना है। यहां सभी सम्प्रदायों के लोग आते हैं।
वर्तमान में युवाओं के अन्धकार मय भविष्य को लेकर भी महाराज जी ने बड़ी चिन्ता जताई और कहा कि ये युवा पीढ़ी देश के भविष्य हैं, देश की धरोहर हैं। इनको डिग्री के साथ अच्छे संस्कार की भी जरूरत है। इसी के अभाव में घर बंट गया, खेती बंट गई, जर-जमीन बंट गई, अरे और कहां तक कहूं यहां तक कि मां, बाप भी बंट गये। कहते हैं कि 10 दिन तुम खिलाओ और दस दिन बाद हमारे पास छोड़ देना। संस्कार पड़ेंगे महात्माओं के सत्संग व उनके सत वचनों से। आप बच्चों को भी सत्संग में लायें। उनको शाकाहारी-सदाचारी बनायें। तभी संस्कार जगेगा। वे आप का और देश का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम में चिलचिलाती धूप के बावजूद चारों तरफ से श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। उनके लिये जगह-जगह पानी, शर्बत प्याऊ एवं भोजन प्रसाद की व्यवस्था थी। पुलिस प्रशासन का भी शांति व्यवस्था बनाये रखने में विशेष योगदान रहा। सत्संग के बाद पंकज जी महाराज जयगुरुदेव जन्मभूमि खितौरा धाम के लिये प्रस्थान कर गये। इससे पहले पंकज जी महाराज का सत्संग के मुख्य व्यवस्थापक जिला अध्यक्ष जसवंत प्रसाद चौरसिया, उमेश चंद्र, प्रमोद कुमार, पप्पू, पंचम सिंह, ओमवीर सिंह, वीरेंद्र सिंह, विष्णु कुमार, सोनी, बुधराम यादव, श्याम बाबू यादव ने पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया गया।इस दौरान रामनरेश यादव, पिन्टू यादव, परशुराम यादव, बबलू मास्टर, बबलू यादव, गौरव, सिग्रेस यादव, राजेश प्रजापति, मुकेश चन्द, सुनील यादव, बाबूलाल रावत जि.अ. लखनऊ, नन्दपाल यादव, फूल कुमार यादव, गया प्रसाद यादव जि.अ. सीतापुर, हरिनारायण भोपा प्रा.उपा. राजस्थान आदि सहित संस्था के कई पदाधिकारी एवं संस्था की सामान्य एवं प्रबन्ध समिति के सदस्य उपस्थित रहे।




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