आकाशकिनारी से खास कुसुंडा तक कोयला विस्तार की तैयारी! Block-E Mega Project से जमीन, रेललाइन और बस्तियों पर बढ़ी चिंता

👉 5,850 करोड़ का Block-E प्रोजेक्ट: 550 हेक्टेयर जमीन पर BCCL की नजर, कई इलाके संभावित दायरे में
👉15 MTPA कोयला उत्पादन का लक्ष्य, लेकिन पचगढ़ी-तेतुलमुड़ी से कुसुंडा तक विस्थापन की चिंता
👉कोयले का मेगा प्लान या जमीन का बड़ा सवाल? Block-E Project से स्थानीय लोगों में हलचल
👉27 साल की परियोजना, करोड़ों टन कोयले का लक्ष्य; अब मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार पर नजर
धनबाद। कोयलांचल की तस्वीर आने वाले वर्षों में बदल सकती है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की प्रस्तावित Block-E Mega Project को धनबाद क्षेत्र की बड़ी कोयला परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है। लगभग 5,850 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ ही जमीन अधिग्रहण, संभावित विस्थापन, पुनर्वास, मुआवजा और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे भी तेजी से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
प्रस्तावित परियोजना का दायरा कतरास-सिजुआ क्षेत्र से लेकर कुसुंडा तक प्रभाव डाल सकता है। उपलब्ध प्रारंभिक जानकारियों और परियोजना से जुड़े क्षेत्रों की चर्चा के अनुसार आकाशकिनारी, अमलगमेटेड केशलपुर वेस्ट, पचगढ़ी, सिजुआ, मोदीडीह, सेंद्रा, निचितपुर, ईस्ट बसुरिया और खास कुसुंडा समेत कई इलाके इसके संभावित प्रभाव क्षेत्र में बताए जा रहे हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परियोजना का प्रभाव क्षेत्र और किसी गांव या बस्ती का अंतिम रूप से अधिग्रहण अथवा विस्थापन का निर्णय अलग-अलग आधिकारिक प्रक्रियाओं, सर्वे, तकनीकी अध्ययन और वैधानिक मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होगा।
👉550 हेक्टेयर जमीन की जरूरत, अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती
Block-E Mega Project के लिए करीब 550 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई जा रही है। इतने बड़े भूभाग में रैयती, गैर-रैयती और विभिन्न प्रकार की भूमि शामिल हो सकती है।
यही कारण है कि पचगढ़ी, तेतुलमुड़ी और आसपास के इलाकों में जमीन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। तेतुलमुड़ी क्षेत्र में लगभग 54.82 एकड़ भूमि अधिग्रहण से जुड़ा मामला पहले से चर्चा में रहा है, जहां जमीन की प्रकृति, मुआवजा और अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब यदि Block-E परियोजना का दायरा व्यापक स्तर पर आगे बढ़ता है, तो सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा केवल जमीन अधिग्रहण नहीं, बल्कि जमीन देने वाले परिवारों का भविष्य होगा।
👉स्थानीय लोगों के सामने सवाल है कि—
क्या जमीन का उचित और वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा मिलेगा?
क्या जमीन खोने वाले परिवारों को पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था मिलेगी?
क्या प्रभावित युवाओं को रोजगार या अन्य आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे?
👉DC रेल लाइन भी परियोजना के लिए अहम मुद्दा
इस मेगा प्रोजेक्ट के सामने केवल जमीन ही चुनौती नहीं है। धनबाद-चंद्रपुरा (DC) रेल लाइन और उससे जुड़े क्षेत्रों को लेकर भी तकनीकी पहलुओं पर विचार किए जाने की संभावना है।
परियोजना क्षेत्र और रेल मार्ग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य में रेललाइन की सुरक्षा, संभावित डायवर्जन अथवा अन्य तकनीकी विकल्पों पर अध्ययन की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि DC रेल लाइन को निश्चित रूप से हटाया जाएगा या उसका डायवर्जन होगा। इस संबंध में अंतिम निर्णय तकनीकी सर्वे, रेलवे, संबंधित मंत्रालयों और अन्य वैधानिक मंजूरियों के आधार पर ही संभव होगा।
लेकिन इतना तय है कि यदि परियोजना के विस्तार का प्रभाव रेल कॉरिडोर तक पहुंचता है, तो यह मुद्दा केवल BCCL का नहीं, बल्कि रेलवे और केंद्र सरकार से जुड़े उच्चस्तरीय निर्णय का विषय बन सकता है।
👉सालाना 1.5 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य
Block-E Mega Project की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन प्रति वर्ष यानी लगभग 1.5 करोड़ टन कोयला प्रतिवर्ष बताई जा रही है।
परियोजना से कुल लगभग 376.30 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है और इसकी संभावित अवधि करीब 27 वर्ष मानी जा रही है।
यदि परियोजना निर्धारित स्वरूप में आगे बढ़ती है तो यह BCCL की बड़ी उत्पादन परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। विशेष रूप से देश में coking coal की बढ़ती जरूरत के बीच घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में इसका महत्व काफी बड़ा माना जा सकता है।
भारत अभी भी कोकिंग कोल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने वाली बड़ी परियोजनाएं रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
👉आकाशकिनारी से कुसुंडा तक—कितने परिवार होंगे प्रभावित?
परियोजना को लेकर सबसे संवेदनशील सवाल संभावित रूप से प्रभावित परिवारों की संख्या है।
आकाशकिनारी, पचगढ़ी, सिजुआ, मोदीडीह, सेंद्रा, निचितपुर, ईस्ट बसुरिया और खास कुसुंडा जैसे क्षेत्रों के नाम परियोजना के संभावित दायरे में चर्चा में हैं। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि किस गांव या मोहल्ले के कितने मकान परियोजना की जद में आएंगे।
कितने परिवारों का विस्थापन होगा, किसे मुआवजा मिलेगा, किसे पुनर्वास मिलेगा और रोजगार की पात्रता किन लोगों को होगी—इन सवालों का विस्तृत और अंतिम जवाब आधिकारिक सर्वे और अधिग्रहण की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
इसलिए फिलहाल किसी पूरे गांव या बस्ती के पूरी तरह उजड़ने का दावा करना उचित नहीं होगा।
लेकिन परियोजना के लिए बड़ी मात्रा में जमीन की जरूरत की चर्चा ने स्थानीय लोगों के बीच स्वाभाविक रूप से चिंता जरूर पैदा कर दी है।
👉सिर्फ कोयला नहीं, सड़क और पर्यावरण भी बड़ा मुद्दा
इतनी बड़ी ओपनकास्ट अथवा बड़े पैमाने की खनन परियोजना का प्रभाव केवल खदान क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। कोयला ढुलाई बढ़ने पर सड़कों पर दबाव, भारी वाहनों की आवाजाही, धूल प्रदूषण, जल निकासी और आसपास की बस्तियों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
👉विशेषज्ञ स्तर पर जिन विषयों पर विशेष ध्यान जरूरी होगा, उनमें—
• भू-धंसान और भूमि स्थिरता
• जल निकासी और बारिश के दौरान जलजमाव
• धूल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण
• भारी वाहनों के लिए सुरक्षित परिवहन मार्ग
• सड़क और रेल संरचना की सुरक्षा
• विस्थापित परिवारों का पुनर्वास
• स्थानीय लोगों की आजीविका और रोजगार
जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
👉BCCL के लिए उत्पादन का अवसर, स्थानीय लोगों के लिए भविष्य की परीक्षा
Block-E Mega Project BCCL के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने का बड़ा अवसर हो सकता है। 15 MTPA के स्तर पर कोयला उत्पादन की क्षमता विकसित होने से कंपनी के उत्पादन ढांचे को मजबूती मिल सकती है।
लेकिन दूसरी ओर, इस परियोजना की सफलता केवल उत्पादन के आंकड़ों से तय नहीं होगी।
👉स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर होगी कि—
जमीन लेने से पहले क्या पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी?
मुआवजा क्या वास्तविक और न्यायसंगत होगा?
पुनर्वास की व्यवस्था परियोजना शुरू होने से पहले होगी या बाद में?
स्थानीय युवाओं को रोजगार और ठेका कार्यों में प्राथमिकता मिलेगी या नहीं?
प्रभावित बस्तियों के लिए सड़क, पानी, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं?
👉विकास बनाम विस्थापन नहीं, संतुलन की जरूरत
धनबाद कोयलांचल में खनन परियोजनाओं के साथ विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा नया नहीं है। यही वजह है कि Block-E जैसी बड़ी परियोजना को लेकर लोगों की चिंता केवल जमीन तक सीमित नहीं है।
लोग जानना चाहते हैं कि जिस विकास परियोजना के लिए उनकी जमीन ली जाएगी, उस विकास में उनका हिस्सा क्या होगा।
यदि परियोजना से देश और BCCL को अधिक कोयला मिलेगा, तो प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को भी सुरक्षित भविष्य, सम्मानजनक पुनर्वास और रोजगार के अवसर मिलने चाहिए।
👉आकाशकिनारी से खास कुसुंडा तक प्रस्तावित Block-E Mega Project आने वाले वर्षों में धनबाद के खनन मानचित्र को बदल सकता है। लेकिन इसके साथ ही यह तय करना भी उतना ही जरूरी होगा कि विकास की कीमत केवल स्थानीय लोग न चुकाएं।
अब सबकी नजर परियोजना की विस्तृत आधिकारिक प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण की वास्तविक स्थिति, प्रभावित परिवारों की सूची, पर्यावरण एवं तकनीकी मंजूरियों और पुनर्वास नीति पर रहेगी।
कोयले का उत्पादन कितना बढ़ेगा, यह भविष्य बताएगा, लेकिन Block-E की असली सफलता इस बात से तय होगी कि परियोजना के साथ स्थानीय लोगों के अधिकार, जमीन, रोजगार और भविष्य को कितनी सुरक्षा मिलती है।

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