Uttar Pradesh News : खाकी के साये में ‘महाकाल’ का खेल? तीन साल से अधिक कार्यखास सिपाही पर सवाल
खखरेरू में पुलिसिंग पर उठे सवाल, पांच माह में आधा दर्जन से अधिक चोरियां और खुलासा शून्य!
ब्यूरो प्रमुख शरद कुमार फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
फतेहपुर। खखरेरू थाना क्षेत्र में इन दिनों पुलिस की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब तीन वर्षों से अधिक एक सिपाही की लगातार तैनाती और उसके कथित रूप से ‘कार्यखास’ बने रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच स्थानीय स्तर पर *‘महाकाल दलाल’ नाम से चर्चित व्यक्ति की गतिविधियों और पुलिस से कथित नजदीकी की चर्चाओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन कहानी का दूसरा पहलू इससे भी ज्यादा गंभीर है। पिछले करीब पांच महीनों में थाना क्षेत्र में करीब आधा दर्जन से अधिक चोरी की घटनाएं होने की चर्चा है, लेकिन कई मामलों में अब तक खुलासा नहीं हो सका। सवालों के घेरे में थाना व्यवस्था क्या लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात सिपाही को विशेष प्रभाव हासिल है? क्या ‘कार्यखास’ की व्यवस्था के पीछे कोई लिखित आदेश है? क्या संबंधित सिपाही की तैनाती विभागीय नियमों के अनुरूप है? और यदि सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो उसकी तैनाती और भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब क्या है?

चोरी की घटनाओं का हिसाब कौन देगा? पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चोरी की घटनाओं का खुलासा है। पीड़ितों को उम्मीद रहती है कि पुलिस उनके नुकसान की भरपाई के लिए चोरों तक पहुंचेगी और चोरी गया सामान बरामद करेगी। लेकिन यदि महीनों बाद भी मामले लंबित हैं तो पुलिस की मुखबिरी व्यवस्था, जांच और गश्त पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर संबंधित सिपाही की तीन साल से अधिक की तैनाती, ड्यूटी चार्ट, थाना जीडी, स्थानांतरण आदेश और पिछले पांच महीनों की चोरी की FIR की समीक्षा कराई जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। साथ ही ‘महाकाल दलाल’ के नाम से चर्चित व्यक्ति की वास्तविक भूमिका और पुलिसकर्मियों से उसके संबंधों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट होगी और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। अब निगाह पुलिस अधीक्षक फतेहपुर की कार्रवाई पर है—क्या खखरेरू थाने की इस कथित व्यवस्था की जांच होगी या फिर चोरी की फाइलें और सवाल दोनों यूं ही दबे रहेंगे?
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