Chhattisgarh News : प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा जनआक्रोश: एसईसीएल कुसमुंडा की लापरवाही से जटराज मार्ग बना ‘मौत का कुआं’, मलबे के कारण टला बड़ा हादसा

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
एसईसीएल प्रबंधन द्वारा ओबी (ओवरबर्डन) डंपिंग की कटाई का काम कराया जा रहा है। बिना किसी ठोस सुरक्षा मापदंड और वैज्ञानिक योजना के की जा रही इस कटाई के कारण हल्की सी बारिश होते ही डंपिंग का भारी-भरकम मलबा, गिट्टी और दलदली कीचड़ सीधे मुख्य मार्ग पर बहकर आ जाता है। हाल ही में हुई बारिश के बाद मुख्य सड़क पर भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा हो गया। इस दौरान वहां से गुजर रही एक तेज रफ्तार कार और कई मोटरसाइकिल सवार अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि चालकों ने सूझबूझ न दिखाई होती, तो मौके पर ही बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था।
जनता के प्रमुख मुद्दे और प्रबंधन की खामियां सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन: डंपिंग कटाई के दौरान मलबे को सड़क पर आने से रोकने के लिए रिटेनिंग वॉल या सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया है।
1 साल से लंबित मांगें: क्षेत्रवासी पिछले 12 महीनों से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और एसईसीएल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। बसाहट के नाम पर खिलवाड़: विस्थापितों और ग्रामीणों को सुरक्षा देने के बजाय उनके आवागमन के रास्ते को ही जानलेवा बना दिया गया है। 7 दिनों का अल्टीमेटम: उग्र आंदोलन की चेतावनी प्रबंधन के इस रवैये से स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्षेत्रवासियों ने एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए 7 दिनों की मोहलत दी है। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि: सड़क पर फैले पूरे कीचड़ और मलबे की तत्काल पोकलेन और जेसीबी से सफाई कराई जाए। डंपिंग साइड पर सुरक्षात्मक उपाय करके इस समस्या का स्थायी व तकनीकी समाधान निकाला जाए। यदि दिए गए 7 दिनों के भीतर समस्या का स्थायी निराकरण नहीं किया जाता है, तो समस्त क्षेत्रवासी एकजुट होकर कुसमुंडा खदान का चक्काजाम, घेराव और उग्र जन-आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी।
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