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Uttar Pradesh News अंबेडकरनगर जिले में कई चिटफंड कंपनियों ने अपना बसेरा डाला और लोगों को चुना लगाया फिर नौ दो ग्यारह हो गई

रिपोर्टर रामतिलक बिश्वकर्मा अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश

अंबेडकरनगर जिले में कई चिटफंड कंपनियों ने अपना बसेरा डाला और लोगों को चुना लगाया फिर नौ दो ग्यारह हो गई। मगर आईडीए के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता फिर भी मैडम के कहने पर लोगों ने लगा दिया लाखों करोड़ों रुपए,ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में लोग कुछ कर गुजरने को तैयार हैं। पुलिस द्वारा लाख हिदायत दी जाती है कि अपने पहचान पत्र को गोपनीय रखें उसके बावजूद हर कोई बेखबर रहता है। आजकल जिले में आई डी ए नाम का ऐप चलने से लाखों युवाओं को रोजगार और पैसा कमाने का ऑफर दिया गया। यह सारा खेल प्रशासन के नाक के नीचे हो रहा है, बावजूद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। (आई डी ए ऐप का कहीं नामोनिशान नहीं है। इसके ब्रांच नहीं है। 9,000 के बदले 100 डॉलर लगाकर आप प्रतिदिन ढाई से तीन डॉलर कमा सकते हैं और एक दूसरे को जोड़ने की प्रक्रिया भी है जिसमें डॉलर के पॉइंट बढ़ेंगे। इस ऐप के जरिए यहां ऐसा भी सुनने में आ रहा है की ठेले पर नींबू लगाने वाला युवक करोड़पति बन गया, कई लोगों के बैंकों में 50 लाख से एक करोड़ तक पैसे गए, जिससे बैंक मैनेजर के भी होश उड़ गए। कई बैंक प्रबंधकों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स की नोटिस जरूर मिलेगी। क्योंकि बैंकिंग सिस्टम सारे पैसों की निगरानी करती है। गंभीर सवाल उठ रहा है क्या इन सभी के अकूत संपत्ति की जांच होगी। चर्चा तरह-तरह की हो रही हैं कि कहीं सभी के आधार कार्ड किसी ऐसे संगठन के तो हाथ नहीं लग गए।इस ऐप को बढ़ावा देने में जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचल तक के कई लोगों का हाथ है। इसी ऐप के जरिए जमीन, गाड़ियां लोगों ने खरीदी होने की भी बात कही जा रही है। हद तो तब हो गई जब $100 लगाने पर दुगने का ऑफर आया। कई स्वर्ण व्यापारियों व अन्य दुकानदारों ने लाखों रुपए दुगने के चक्कर में लगा दिए, मगर कुछ दिन बीतने के बाद जब डॉलर विड्रा नहीं हुआ तो लोग अपनी किस्मत की लकीरों को मलते दिखें। आज के समय में हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है। आपका फोन एक कुंजी कहा जा सकता है। इस ऐप से जुड़ने के लिए लोगों के आधार को लिंक कराया गया, आधार की फोटो कॉपी और सेल्फी लगाई गई। चिंता का विषय यह है कि कई हजार लोगों के आधार कार्ड विदेशी कंपनी के हाथ लगने की सम्भावना भी जताई जा रही है, भविष्य में कभी भी गलत इस्तेमाल भी हो सकता है ।

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