Jharkhand News : परीक्षा रद्द होने से सिर्फ नौकरी नहीं, रिश्ते भी टूटे: अभ्यर्थी ने बयां किया दर्द
सालों की मेहनत पर फिरा पानी, अभ्यर्थी बोला—न नौकरी मिली, न जीवनसाथी
ब्यूरो चीफ मिथिलेश पांडे धनबाद झारखण्ड
रांची। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए किसी भर्ती परीक्षा का रद्द होना केवल एक परीक्षा प्रक्रिया का रुकना नहीं होता, बल्कि इसके साथ वर्षों की मेहनत, समय, उम्र और भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से जारी विवाद और अनिश्चितता के बीच एक अभ्यर्थी ने अपनी निजी जिंदगी पर पड़े असर को साझा करते हुए अपना दर्द बयां किया है। झारखंड मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे उक्त अभ्यर्थी के मुताबिक, वर्ष 2019 में उसने उत्पाद सिपाही की परीक्षा दी थी। उसका दावा है कि परीक्षा में उसका प्रदर्शन काफी बेहतर रहा था और 500 से अधिक अंक आने की उम्मीद थी। इसी भरोसे के बीच उसने अपने भविष्य को लेकर कई सपने संजोए थे। नौकरी की उम्मीद के साथ शादी की तैयारी भी शुरू हुई अभ्यर्थी ने बताया कि सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद के बीच उसके परिवार ने शादी के लिए रिश्ता भी तय कर लिया था। दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ चुकी थी और शादी को लेकर सहमति बन गई थी। उसे भरोसा था कि नौकरी मिलने के बाद उसका जीवन एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में आई अनिश्चितता ने उसकी व्यक्तिगत जिंदगी को भी प्रभावित कर दिया। परीक्षा रद्द होने की खबर से टूटा भरोसा अभ्यर्थी के अनुसार, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद उसे उम्मीद जगी थी कि अब वर्षों की मेहनत का फल मिलने वाला है। इसी बीच मंगलवार देर रात परीक्षा रद्द किए जाने की खबर सामने आई। उसका कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद शादी के लिए चल रही बातचीत भी प्रभावित हुई और आखिरकार रिश्ता टूट गया।

उसका दावा है कि होने वाली दुल्हन ने भी उससे संपर्क खत्म कर लिया और अलग-अलग माध्यमों से उसे ब्लॉक कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम को बताते हुए अभ्यर्थी भावुक हो गया और कहा कि उसके सामने ऐसी स्थिति आ गई है, जहां उसे लगता है कि न नौकरी मिली और न ही रिश्ता बच पाया। दोबारा प्रक्रिया शुरू हुई तो उम्र बनी सबसे बड़ी चुनौती अभ्यर्थी का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू होने में वर्षों का समय लग गया। इस दौरान उसकी उम्र बढ़ गई और शारीरिक क्षमता भी पहले जैसी नहीं रही। अब नए सिरे से होने वाली शारीरिक परीक्षा में युवाओं के साथ दौड़ लगाने की चुनौती उसके सामने है। उसका कहना है कि जिस समय उसने परीक्षा दी थी, तब उसकी उम्र और फिटनेस अलग थी। वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया के अधर में रहने के कारण अब उसके लिए कम उम्र के अभ्यर्थियों के साथ शारीरिक परीक्षा में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया है।
युवाओं की मांग—भर्ती प्रक्रिया में हो स्थिरता अभ्यर्थी का दर्द केवल व्यक्तिगत परेशानी तक सीमित नहीं है। उसका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार बदलाव, विवाद और रद्दीकरण का सीधा असर उन युवाओं पर पड़ता है, जो कई वर्षों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा की प्रक्रिया लंबी खिंचने से उनकी उम्र बढ़ती है और रोजगार के दूसरे अवसर भी हाथ से निकल जाते हैं। झारखंड के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अभ्यर्थियों की मांग है कि भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध, पारदर्शी और स्थिर बनाया जाए, ताकि वर्षों तक तैयारी करने वाले युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता का असर न पड़े। उत्पाद सिपाही भर्ती से जुड़े इस अभ्यर्थी की आपबीती इस बात की ओर भी इशारा करती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का असर केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक चलने वाली भर्ती प्रक्रिया युवाओं के करियर, उम्र, आर्थिक स्थिति और निजी रिश्तों तक को प्रभावित कर सकती है।

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