Chhattisgarh News : परसाडीह आश्रम में ‘10 लाख’ का रहस्य! काम अधूरा, फिर भी लगा दिया पूर्णता का बोर्ड
दीवारों में दरारें, छत से टपक रहा पानी, टूटे दरवाजे और खिड़कियां; कागजों में पूरा काम दिखाने की तैयारी पर उठे सवाल
ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
जैजैपुर/सक्ती। सरकारी कामों में कागज और जमीन की हकीकत के बीच कितना बड़ा फासला हो सकता है, इसकी तस्वीर ग्राम पंचायत परसाडीह के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रम भवन में दिखाई दे रही है। मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत हुए, काम अभी अधूरा है, लेकिन भवन पर कार्य पूर्ण होने का बोर्ड जरूर लगा दिया गया। अब यही बोर्ड पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। आश्रम भवन की हालत देखकर मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें हैं, बारिश के दौरान छत से पानी टपक रहा है। खिड़की और दरवाजों की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि 10 लाख रुपये की मरम्मत राशि आखिर किस काम में खर्च हुई?
काम अधूरा, बोर्ड पर ‘पूर्ण’—किसे दिखाने की थी जल्दी? मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि आश्रम में मरम्मत का काम पूरा हुए बिना ही कार्य पूर्ण होने का बोर्ड लगा दिया गया। हालांकि जनपद पंचायत जैजैपुर के सीईओ संदीप कश्यप ने स्वयं निरीक्षण किए जाने की बात कही है और स्पष्ट किया है कि कार्य अभी अधूरा है तथा मूल्यांकन के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा। सीईओ के इस बयान के बाद अब सवाल यह है कि यदि काम पूरा नहीं हुआ था तो कार्य पूर्णता का बोर्ड किस आधार पर लगाया गया? 10 लाख की राशि पर जनप्रतिनिधि ने लगाए गंभीर आरोप जनपद सदस्य क्षेत्र क्रमांक 15 श्याम लाल जांगड़े ने सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आश्रम मरम्मत के लिए स्वीकृत 10 लाख रुपये में बंदरबांट की गई है। उनका कहना है कि आश्रम की खिड़की और दरवाजे टूटे हुए हैं, शौचालय का दरवाजा भी खराब है, जिससे यहां रहने वाले बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। बच्चों के आश्रम में ही मरम्मत का खेल? यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहां गरीब और मजदूर परिवारों के बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। शासन द्वारा इन बच्चों के लिए भवन, भोजन और बेहतर सुविधाओं पर हर साल बड़ी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में यदि मरम्मत के नाम पर राशि खर्च होने के बावजूद भवन की हालत जर्जर बनी रहती है तो यह सिर्फ सरकारी धन के इस्तेमाल का सवाल नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से भी जुड़ा मामला है।

अब जांच से खुलेगा 10 लाख का राज जनपद पंचायत सीईओ संदीप कश्यप ने निरीक्षण के बाद कार्य अधूरा पाए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि मूल्यांकन के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा। अब असली सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है—10 लाख की स्वीकृत राशि में अब तक कितना काम हुआ, कितना भुगतान हुआ, किसके सत्यापन पर हुआ और कार्य पूर्ण होने का बोर्ड आखिर किसने लगवाया? यदि जांच में वित्तीय अथवा तकनीकी अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ-साथ सरकारी राशि की वसूली भी जरूरी होगी। फिलहाल परसाडीह आश्रम का यह मामला पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी और सरकारी धन के इस्तेमाल पर एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। हर सरकारी कार्य में मंत्री से लेकर जन्म प्रतिनिधि एवं अधिकारी कर्मचारी सरकारी योजनाओं की जो भी राशि मिलती है खर्च करने के लिए निर्माण हो या अन्य कार्य कमीशन पहले निकलते हैं फिर उसके बाद विकास कार्य करते हैं और यहीं से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का काम होता है। और वहीं पर जनता प्रतिनिधि और अधिकारी पत्रकारों को विज्ञापन देने के लिए पैसा नहीं है कहा जाता है और साथ ही साथ विकास राशि पर शराब खोरी का कार्य करते हैं।

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