IC News and Media House Private Limited


ब्रेकिंग न्यूज़

Uttar Pradesh News : माँ ज्वालामुखी मंदिर विवाद पर संचालन समिति ने रखा पक्ष, जांच दस्तावेजों का दिया हवाला

बकाया किराये और मंदिर संपत्ति को लेकर आरोपों पर समिति ने रखे तथ्य, 2005 से 2023 तक की जांच का किया उल्लेख

रिपोर्टर चन्द्रिका प्रसाद उत्तर प्रदेश

बकाया किराये और मंदिर संपत्ति को लेकर समिति ने रखे दस्तावेज, 2005 से 2023 तक हुई जांच का दिया हवाला प्रधान पुजारी पं. श्लोकी मिश्रा का हेमंत मिश्रा को खुला चैलेंज- पूजा-पद्धति का ज्ञान साबित करें 2026 में लगाए गए आरोपों की जांच जारी, समिति बोली-सभी पक्षों को सुनकर तथ्यों के आधार पर हो निष्पक्ष कार्रवाई शक्तिनगर, सोनभद्र। माँ ज्वालामुखी भगवती संचालन समिति, शक्तिनगर की ओर से मंदिर प्रबंधन, मंदिर संपत्ति और प्रधान पुजारी पं. श्लोकी प्रसाद मिश्रा के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में समिति ने अपना पक्ष रखा। समिति ने आरोपों की पृष्ठभूमि में मंदिर परिसर की दुकान के बकाया किराये तथा मंदिर संपत्ति से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए विभिन्न जांच एवं प्रशासनिक आदेशों का हवाला दिया। समिति के अनुसार मंदिर की भूमि गाटा संख्या 536, रकबा 0.52 डिसमिल पर मंदिर समिति द्वारा दुकान का निर्माण कराया गया था। समिति का आरोप है कि उक्त दुकान रामलखन मिश्रा द्वारा अपने पौत्र हेमंत मिश्रा को मंदिर समिति से विधिवत राय-मशविरा अथवा समिति की बैठक की अनुमति के बिना दे दी गई। समिति के अनुसार दुकान का किराया लंबे समय से बकाया है और वर्तमान में लगभग 13.50 लाख रुपये बकाया बताया जा रहा है। समिति ने प्राचीन पीपल वृक्ष एवं स्वयंभू शिवलिंग से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। समिति के अनुसार दुकान के पीछे स्थित प्राचीन पीपल वृक्ष के समीप स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन-पूजन की परंपरा रही है। समिति का आरोप है कि बाद में शिवलिंग को दुकान के सामने स्थापित किया गया और पीपल के वृक्ष को घेरकर वहां पेड़ा फैक्ट्री स्थापित की गई। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पेड़ा फैक्ट्री के लिए मंदिर परिसर के शिव, गणेश, हनुमान एवं भैरव मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले जल की निकासी का मार्ग बाधित किया गया।

2005 से 2023 तक की जांच का हवाला, 2026 के आरोपों की जांच जारी संचालन समिति ने बताया कि मंदिर प्रबंधन एवं प्रधान पुजारी के विरुद्ध पूर्व में भी शिकायतें की गईं। समिति के अनुसार 2005 में मंदिर के दानपात्र एवं चढ़ावे से संबंधित आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद राजस्व निरीक्षक, लेखपाल एवं स्थानीय प्रशासन स्तर पर जांच हुई। समिति का दावा है कि मंदिर के खाते की जांच में कोई वित्तीय अनियमितता नहीं पाई गई तथा दुकानों के किराये से संबंधित निर्देश दिए गए। समिति के अनुसार 2008 में पुनः शिकायत के बाद जिलाधिकारी स्तर से जांच कराई गई। तत्कालीन उपजिलाधिकारी की जांच में समिति में अनियमितता नहीं पाई गई और आरोप सिद्ध नहीं हुए। इसी कार्रवाई में दुकान के बकाया किराये के रूप में ₹4.40 लाख जमा कराने के निर्देश दिए जाने का समिति ने दावा किया। 2013 और 2018 की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए समिति ने कहा कि सहायक रजिस्ट्रार, चिट फंड एवं रजिस्ट्रार स्तर पर हुई जांचों में समिति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया और समिति के नवीनीकरण की कार्रवाई जारी रही। 2019 में धर्मार्थ कार्य विभाग, जिलाधिकारी सोनभद्र, उपजिलाधिकारी दुद्धी एवं तहसीलदार दुद्धी स्तर पर हुई कार्रवाई का भी समिति ने उल्लेख किया। वहीं 2023 में उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका के बाद मंडलायुक्त, मिर्जापुर मंडल को जांच सौंपे जाने और समिति के अनुसार जांच में अध्यक्ष पं. श्लोकी मिश्रा के विरुद्ध अनियमितता अथवा धोखाधड़ी नहीं पाए जाने का दावा किया गया। समिति ने कहा कि 2026 में पुनः लगाए गए आरोपों की जांच वर्तमान में संबंधित स्तर पर चल रही है और समिति जांच प्रक्रिया का सम्मान करते हुए इसमें सहयोग कर रही है।

प्रधान पुजारी ने हेमंत मिश्रा को दिया खुला चुनौती, बोले- धार्मिक परंपरा का ज्ञान साबित करें प्रेस वार्ता के दौरान प्रधान पुजारी पं. श्लोकी प्रसाद मिश्रा ने हेमंत मिश्रा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे माँ ज्वालामुखी मंदिर की पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपराओं का ज्ञान रखते हैं तो इसे सामने आकर साबित करें। पं. श्लोकी प्रसाद मिश्रा ने कहा, “यदि हेमंत मिश्रा जी यह बता दें कि माँ ज्वालामुखी का स्वरूप किस पर स्थित है और एक समय की पूजा के लिए माँ का श्रृंगार एवं वस्त्र बदलकर दिखा दें, तो मैं मंदिर उन्हें सौंपकर वहां से चला जाऊंगा।” प्रधान पुजारी ने कहा कि मंदिर की पूजा-पद्धति, परंपरा और धार्मिक व्यवस्थाओं की जानकारी केवल आरोप लगाने से साबित नहीं होती, बल्कि उसके लिए मंदिर की परंपराओं एवं पूजा-विधि का व्यावहारिक ज्ञान होना आवश्यक है। संचालन समिति ने कहा कि हेमंत मिश्रा यदि अपने पक्ष में कोई दस्तावेज, तथ्य या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। वे प्रेस वार्ता में उपस्थित होकर अपना पक्ष एवं सवाल रख सकते हैं। समिति ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, सोशल मीडिया एवं YouTube मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि मंदिर से जुड़े संवेदनशील विषय पर समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले सभी पक्षों का पक्ष लिया जाए और उपलब्ध सरकारी एवं प्रशासनिक दस्तावेजों का अवलोकन किया जाए। समिति के अनुसार उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन एवं मंदिर संपत्ति से जुड़े तथ्यों को सामने रखना और निष्पक्ष जांच में सहयोग करना है।

ChatGPT Image Jun 19, 2026, 03_57_34 PM

Related Articles

Back to top button