Chhattisgarh News : कोरबा: RTI में फर्जी जानकारी देने का आरोप, कृषि महाविद्यालय के जन सूचना अधिकारी डॉ दुष्यंत कौशिक पर FIR दर्ज करने की मांग
ब्यूरो चीफ उदित कुमार कोरबा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। कटघोरा स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी डॉ. दुष्यंत कौशिक पर अपने पद का दुरुपयोग करने और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भ्रामक व फर्जी दस्तावेज तैयार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। सबसे युवा एवं सक्रिय RTI कार्यकर्ता उदित कुमार ने इस मामले में थाना प्रभारी कटघोरा और पुलिस अधीक्षक कोरबा को लिखित शिकायत सौंपकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता उदित कुमार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 20 अप्रैल 2026 को RTI के तहत कॉलेज की कैश बुक, ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय वर्ष 2025-26 के बिल-वाउचर सहित कुल 6 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। लेकिन संस्थान की संभावित वित्तीय गड़बड़ियों को छुपाने के इरादे से जन सूचना अधिकारी डॉ. दुष्यंत कौशिक ने दुर्भावनापूर्वक आवेदन को निरस्त कर दिया और यह लिख दिया कि मांगी गई जानकारी स्पष्ट नहीं है।

प्रथम अपीलीय अधिकारी का कड़ा निर्देश इस भ्रामक जवाब के खिलाफ आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर की। सुनवाई के बाद अपीलीय अधिकारी ने जन सूचना अधिकारी के जवाब को पूरी तरह खारिज कर दिया और 10 कार्यदिवस के भीतर आवेदक को दस्तावेजों का अवलोकन कराने का कड़ा निर्देश दिया। जब आवेदक ने आदेश के पालन में कॉलेज जाकर दस्तावेजों का निरीक्षण किया, तो वहां सभी रिकॉर्ड पूरी तरह व्यवस्थित और उपलब्ध पाए गए। इससे यह साफ हो गया कि जन सूचना अधिकारी के पास सारे रिकॉर्ड मौजूद थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर आवेदक को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए फर्जी और झूठा शासकीय जवाब तैयार किया था। आवेदक उदित कुमार ने पुलिस को दिए आवेदन में डॉ. दुष्यंत कौशिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198,201,318, 336,340 और 342 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। आवेदक ने पूरे मामले के दस्तावेज और सबूत पुलिस को सौंप दिए हैं और आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। अब देखना होगा कि इस मामले में कोरबा पुलिस आगे क्या कदम उठाती है , क्योंकि पुलिस ने अभी तक आरोपी जन सूचना अधिकारी डॉ. दुष्यंत कौशिक के साथ एक राय हो कर मामले पर कोई कार्यवाही नहीं करते हुए केवल और केवल मौन स्वीकृति प्रदान किया है।



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