Uttar Pradesh News : इमाम सज्जाद ने पैगाम-ए-कर्बला को दुनिया तक पहुंचाया – मौलाना मैहदी अब्बास

रिपोर्टर नौरोज़ हैदर बिजनौर उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश जनपद बिजनौर के हल्दौर क्षेत्र के गांव छजूपुरा सादात में अशरा-ए-चेहलुम हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के तहत आयोजित दस दिवसीय मजलिसों का सिलसिला चौथे दिन भी जारी रहा। दरगाहे फातेमा ज़हरा और इमामबारगाह में आयोजित मजलिसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मीडिया प्रभारी शाही वास्ती के संचालन में आयोजित पहली मजलिस को मौलाना सैय्यद मैहदी अब्बास ज़ैदी ने खिताब किया। उन्होंने हज़रत इमाम सज्जाद (अ.स.) की जिंदगी और कर्बला के बाद उनके मसायब पर रोशनी डालते हुए कहा कि उन्होंने कैद, तकलीफों और कठिन परिस्थितियों में भी सब्र, इबादत और इस्तेकामत का ऐसा पैगाम दिया, जो पूरी इंसानियत के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा कि इमाम सज्जाद (अ.स.) ने अपने खुत्बों और दुआओं के जरिए पैगाम-ए-कर्बला को दुनिया तक पहुंचाया और यज़ीदी सोच को बेनकाब किया।

दूसरी मजलिस में मौलाना सैय्यद सलमान अब्बास ने कर्बला के बाद अहलेबैत (अ.स.) के लुटे हुए काफिले के यज़ीद के दरबार में पहुंचने के दर्दनाक मंजर बयान किए। उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) और बीबी ज़ैनब (स.अ.) ने अपने ऐतिहासिक खुत्बों से हक और बातिल का फर्क पूरी दुनिया के सामने उजागर किया। उन्होंने कहा कि अहलेबैत (अ.स.) की कुर्बानियां इंसानियत, सब्र और दीन की हिफाजत का हमेशा जिंदा रहने वाला पैगाम हैं। मजलिसों में मरसियाखानी मौहम्मद रज़ा, नायाब हैदर, मौहम्मद अब्बास, मौहम्मद आलम और सालिम ज़ैदी ने की, जबकि पेशखानी रईस ज़ैदी ने की। मजलिस के बाद नौहाख्वानी और मातम हुआ। गमगीन माहौल में अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। अंत में मुल्क में अमन, भाईचारे और इंसानियत की सलामती के लिए दुआ कराई गई।


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