2 अगस्त को शहीद शक्तिनाथ महतो की पुण्य जयंती पर होगा भव्य श्रद्धांजलि समारोह, भाजपा नेताओं ने प्रेसवार्ता कर दी जानकारी

👉शहीद शक्तिनाथ महतो की पुण्य जयंती को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी, कई जनप्रतिनिधि होंगे शामिल
👉तेतुलमुड़ी में प्रेसवार्ता, 2 अगस्त को शहीद शक्तिनाथ महतो को दी जाएगी भावभीनी श्रद्धांजलि
👉भाजपा किसान मोर्चा ने की आयोजन की घोषणा, शहीद शक्तिनाथ महतो की पुण्य जयंती पर जुटेंगे दिग्गज नेता
धनबाद (तेतुलमुड़ी): तेतुलमुड़ी बस्ती स्थित शहीद शक्तिनाथ महतो विद्यालय परिसर में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी सुरेश महतो ने प्रेसवार्ता आयोजित कर शहीद शक्तिनाथ महतो की 2 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाली पुण्य जयंती समारोह की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी शहीद शक्तिनाथ महतो की पुण्य जयंती पूरे श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई जाएगी।
प्रेसवार्ता में भाजपा महानगर धनबाद के अध्यक्ष श्रवण राय, जिला अध्यक्ष महेश पासवान, मंडल अध्यक्ष असीम कुमार, पूर्व जिला उपाध्यक्ष (ग्रामीण) रमेश महतो, पूर्व पार्षद धर्मेंद्र महतो उर्फ डिस्को तथा जिला कार्यसमिति (ग्रामीण) सदस्य प्रदीप वर्मा सहित कई भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आयोजकों ने बताया कि 2 अगस्त को आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में धनबाद सांसद ढुल्लू महतो, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो, झरिया विधायक रागिनी सिंह, धनबाद विधायक राज सिन्हासहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है।
प्रेसवार्ता के दौरान वक्ताओं ने शहीद शक्तिनाथ महतो के जीवन और उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जन्म 2 अगस्त 1948 को धनबाद के तेतुलमुड़ी गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा जोगता प्राथमिक विद्यालय तथा गांधी स्मारक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद धनबाद आईटीआई से फिटर ट्रेड का प्रशिक्षण लेकर बीसीसीएल के मुनीडीह प्रोजेक्ट में कार्यरत रहे।
बताया गया कि शहीद शक्तिनाथ महतो केवल एक कर्मठ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और झारखंड आंदोलन के सक्रिय योद्धा भी थे। झारखंड आंदोलन के पुरोधा विनोद बिहारी महतो के सान्निध्य में उन्होंने शिक्षा के प्रसार, बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशामुक्ति जैसे सामाजिक मुद्दों पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया। उनके सामाजिक कार्यों और जनसरोकारों के कारण वे क्षेत्र में विशेष पहचान रखते थे।
वक्ताओं ने कहा कि 28 नवंबर 1977 को सिजुआ में अपराधियों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी। उनके बलिदान और समाज के प्रति समर्पण को स्मरण करते हुए प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्य जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है। इस वर्ष भी आयोजन को भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

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