Chhattisgarh News : रोजगार की मांग पर कुसमुंडा में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, SECL मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय का किया महाघेराव!”
रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
रोजगार की वाजिब मांग को लेकर आज कुसमुंडा और उसके आसपास के गांवों के हजारों ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर कुसमुंडा स्थित SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के मुख्य महाप्रबंधक (GM) कार्यालय का जोरदार घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने SECL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि खदानों व विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को रोजगार में पहली प्राथमिकता दी जाए। बाहरी राज्यों से आ रहे मजदूरों पर जताया विरोध आंदोलन के दौरान मीडिया से बात करते हुए स्थानीय भू-विस्थापित अशोक कुमार पटेल ने बताया कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से शासन-प्रशासन को इस संबंध में आवेदन दे रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि SECL में काम करने वाली प्राइवेट कंपनियां (जैसे हाल ही में आई सोनू-मोनू कंपनी) ट्रायल और इंटरव्यू के नाम पर जानबूझकर स्थानीय भू-विस्थापित युवाओं को फेल कर देती हैं, जबकि बाहरी राज्यों से हजारों की संख्या में मजदूरों को लाकर यहाँ काम पर रखा जा रहा है। इसके कारण स्थानीय और प्रभावित क्षेत्र के युवा पूरी तरह से रोजगार से वंचित होकर बेरोजगार घूम रहे हैं।

जेल भेजने की कार्रवाई की कड़ी निंदा ग्रामीणों ने इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया कि जब भू-विस्थापित और प्रभावित किसान अपने हक और अधिकार के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करते हैं, तो SECL प्रबंधन और प्रशासन द्वारा उन्हें दबाने के लिए जेल भेज दिया जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि जिन किसानों ने राष्ट्रहित में अपनी कीमती जमीनें दे दीं, आज उनके साथ ही ऐसा अन्याय किया जा रहा है, जिसकी वे कड़ी निंदा करते हैं। प्रबंधन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद फिलहाल महाघेराव के बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रबंधन उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लेता, उनका यह आक्रोश शांत नहीं होगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि SECL प्रबंधन स्थानीय युवाओं को उनका हक देने के लिए क्या कदम उठाता है।



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