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Uttar Pradesh News : ​राम मंदिर ट्रस्ट को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस स्वागत योग्य; धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप बंद करे सरकार: सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

रिपोर्टर रफ़ी उल्लाह खान रामपुर उत्तर प्रदेश

रामपुर से सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट को जारी किए गए नोटिस का स्वागत किया है। कोर्ट ने ट्रस्ट से पूछा है कि इस मामले में अब तक स्वतंत्र जांच की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाए गए हैं। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सांसद नदवी ने देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और सभी धर्मों की स्वायत्तता को लेकर सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए हैं। सांसद नदवी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी की शख्सियत हमेशा से सर्वप्रिय रही है। अविभाजित भारत में अल्लामा इकबाल मरहूम ने भी उन्हें ‘इमाम-ए-हिंद’ कहकर पुकारा था। उन्होंने कहा कि एक ऐसी महान शख्सियत के नाम पर बनी ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद के पवित्र ढांचे को ढहाया जाना बेहद दुखद था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हमेशा के लिए सुलझाने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आस्था के आधार पर फैसला दिया था। देश को उम्मीद थी कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के बाद ऐसे विवादों पर हमेशा के लिए विराम लग जाएगा, लेकिन हालिया घटनाक्रमों से इस पूरी प्रक्रिया को ठेस पहुंची है।

सांसद नदवी ने जेपीसी (JPC) में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का हवाला देते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा हमने हमेशा यह स्टैंड लिया है कि सरकार को किसी भी समुदाय के धार्मिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। लेकिन सरकार हठधर्मिता पर अड़ी है और वक्फ व हज जैसी विशुद्ध धार्मिक कमेटियों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने की वकालत कर रही है। सरकार का तर्क है कि इससे भ्रष्टाचार खत्म होगा सरकार के इसी तर्क को आड़े हाथों लेते हुए सांसद ने पूछा अगर भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए वक्फ बोर्ड में दूसरे समुदायों के लोगों को लाना सही है, तो क्या यही दर्शन राम मंदिर ट्रस्ट पर भी लागू होगा क्या वहां भी किसी दलित, सिख या मुस्लिम को ट्रस्टी बनाया जाएगा अगर वक्फ के लिए यह दर्शन सही है, तो इसे राम मंदिर ट्रस्ट पर भी लागू किया जाना चाहिए। सांसद मोहिबुल्लाह जी ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी धर्म के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के पक्षधर नहीं हैं। सिख, ईसाई, मुसलमान और वैदिक/सनातन धर्म की अपनी-अपनी अनूठी और प्राचीन परंपराएं, रीति-रिवाज व मर्यादाएं हैं। सरकार को इन सभी की स्वायत्तता का सम्मान करना चाहिए और इन्हें एक ही लाठी से हांकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए उन्होंने अपने बयान के अंत में सांसद नदवी ने एक मशहूर शेर के जरिए सरकार को अपनी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा नशा पिला कर गिराना तो सबको आता है, मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी। ​उन्होंने सरकार से अपील की कि वह देश के युवाओं, छात्रों और नागरिकों को सड़कों पर आंदोलित करने के बजाय उनके मुद्दों को हल करे और देश में भाईचारे व सौहार्द का माहौल बनाए रखे ये जानकारी सांसद मीडिया प्रभारी एडवोकेट महबूब अली पाशा ने दी

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