Chhattisgarh News : पद्म विभूषण डॉ तीजन बाई की कापालिक शैली वाली पंडवानी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए वर्तमान में जो नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है तो वह नाम है कुमारी दुर्गा साहू ।
ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
दुर्गा साहू का जन्म 28 अगस्त सन 2000 को रायपुर जिला, तिल्दा ब्लॉक के छोटे से गांव निनवा में हुआ । उनके पिता स्वर्गीय जितेंद्र कुमार साहू तथा माता का नाम सेवती बाई साहू है। कुमारी दुर्गा जब कक्षा आठवीं में थी तब सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान उसके गुरु निर्मल साहू (शिक्षक) ने पंडवानी शैली में कुछ कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए कहा बस वहीं से उनके पंडवानी की शुरुआत हो गई लेकिन वास्तविक में जब वह कक्षा दसवीं में थी तब पांडवों की कथा को गाना प्रारंभ किया और तब से लेकर आज तक 11 साल के सफर में उन्होंने लगभग 1200 मंचों के माध्यम से कापालिक शैली में अपनी प्रस्तुति देती आ रही हैं। दुर्गा साहू न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि आसपास के राज्यों महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, झारखंड,मध्य प्रदेश आदि में भी अपनी प्रस्तुति देती रही है ।

उन्हें अब तक उनकी उपलब्धियों के लिए युवा सम्मान, सामाजिक समरसता सम्मान, नारी शक्ति सम्मान, नारी तू नारायणी सम्मान, अदम्य नारी सम्मान तथा कला शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है इसके साथ ही उसे सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय सम्मान से भी नवाजा गया है। पंडवानी के उसके सफर में उनके गुरु निर्मल साहू रागी की भूमिका में हमेशा उसके साथ रहते हैं और पंडवानी के उत्तरोत्तर विकास के लिए प्रयासरत रहते हैं पंडवानी के अलावा लोकगाथा भरथरी पर भी दुर्गा साहू का पकड़ बहुत ही मजबूती के साथ रहा है और इसका मंचन भी प्रभावशाली ढंग से कर रही है। पढ़ाई की बात करें तो कुमारी दुर्गा साहू गणित में एमएससी हैं, B.Ed हैं, छत्तीसगढ़ी में एम ए कर चुकी हैं। साथ ही लोक संगीत, सुगम संगीत और शास्त्रीय संगीत में डिप्लोमा कर चुकी हैं।



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