एम्स की तकनीक सुधारेगी मातृ-शिशु स्वास्थ्य महिला एवं बाल विकास विभाग व एम्स के मध्य होगा एमओयू

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश
प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के गाँवों तक मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर बदलने वाली है। महिला बाल विकास विभाग और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मध्य एमओयू किया जायेगा। एमओयू से एम्स की हाईटेक तकनीक और विशेषता का लाभ सीधे फ्रंटलाइन वर्कर्स को मिलेगा। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक में इस साझेदारी को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आंगवाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण की सटीक पहचान और त्वरित इलाज के लिए एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा स्पेशल क्लिनिकल ट्रेंनिंग दी जाएगी। एम्स भोपाल की तकनीकी विशेषज्ञता से हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स और आंगनवाड़ी केंद्रों को नई मजबूती मिलेगी, जिससे नीतिगत स्तर पर सटीक और डेटा-संचालित निर्णय लिये जा सकेंगे। यह एमओयू महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अंतर्गत संचालित ‘स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ व ‘स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट’ के बीच होगा। इस साझेदारी के तहत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी टीम द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर्स और परियोजना अधिकारियों को विशेष तकनीकी और चिकित्सा प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य के जनजातीय बाहुल्य जिलों—झाबुआ और धार में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की जा चुकी है, जिसके आने वाले समय में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टर वर्तमान में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही, आईसीएमआर और एनसीओई नई दिल्ली के सहयोग से बेहतर अनुपूरक आहारऔर परिवारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘व्यवहार परिवर्तन संचार’ पर भी शोध किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक डेटा के माध्यम से सही समय पर गंभीर बीमार या कुपोषित बच्चों को उचित उपचार देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। यह साझेदारी दीर्घकालिक रूप से मध्यप्रदेश में विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के कन्वरजेंस (एकीकरण) को बढ़ावा देगी।




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