Chhattisgarh News : एसईसीएल कुसमुंडा खदान क्षेत्र में भू- विस्थापितों का भारी हंगामा, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद रोजगार न मिलने पर गेट पर जड़ा ताला

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा (छत्तीसगढ़)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) कुसमुंडा क्षेत्र में भू-विस्थापित और प्रभावित परिवारों का आक्रोश एक बार फिर फूट पड़ा है। लंबित प्रकरणों का समय पर निराकरण न होने और प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर डराए-धमकाए जाने के विरोध में विस्थापित परिवारों ने शासन-प्रशासन और एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों को एक संयुक्त अल्टीमेटम जारी किया है। प्रभावितों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर उनकी जायज मांगों का निपटारा नहीं किया गया, तो कुसमुंडा क्षेत्र के सभी कार्यालयों के मुख्य द्वारों पर तालाबंदी की जाएगी और खदान का परिचालन (कार्य) पूरी तरह से ठप (खदान बंदी) कर दिया जाएगा।
यह कड़ा कदम विस्थापित परिवारों द्वारा एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधक तथा एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सीएमडी को सौंपे गए एक औपचारिक आवेदन के बाद सामने आया है। इस पत्र को क्षेत्र के विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों, जैसे कलेक्ट्रेट कार्यालय कोरबा और अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय द्वारा भी प्राप्त कर लिया गया है, जिस पर जून 2026 की आधिकारिक मुहरें और पावतियां दर्ज हैं।
प्रमुख मांगें और फर्जी नियुक्तियों के गंभीर आरोप: विस्थापितों द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र में मुख्य रूप से दो परिवारों की भूमि अधिग्रहण और रोजगार से जुड़े गंभीर मामलों का विवरण दिया गया है: नियम विरुद्ध फर्जी नियुक्तियों पर बर्खास्तगी और असली वारिस का हक: मामला: ग्राम मनगांव (वर्तमान निवासी नरईबोध, तहसील दीपका, जिला कोरबा) की भू-विस्थापित गोमती केंवट (पति विजय केंवट) का आरोप है कि उनकी अधिग्रहित भूमि पर पूर्व में प्रहलाद (पिता रमेश) नामक एक व्यक्ति को फर्जी तरीके से एसईसीएल कुसमुंडा में नियुक्ति दे दी गई थी। मांग: ग्रामीणों के कड़े विरोध और आंदोलन के बाद उक्त फर्जी व्यक्ति को सेवा से बर्खास्त तो कर दिया गया है, परंतु अब पीड़ित परिवार ने मांग की है कि नियमानुसार भूमि के असली वारिस को तत्काल स्थायी रोजगार प्रदान किया जाए। भूमि रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी की जांच: मामला: ग्राम दुरपा मोंगरा भांठा (वर्तमान पता चुनचुनी गेवराबस्ती, तहसील दर्री) के इंदिरा गोसाई (पिता अमृत लाल) से जुड़ा हुआ है।
मांग (क): नूरखां उर्फ नूतन (पिता मोहम्मददीन) की एसईसीएल कुसमुंडा में अर्जित संपूर्ण भूमि का आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह प्रमाणित लिखित जानकारी दी जाए कि उक्त भूमि के बदले अब तक कितने लोगों को नियमत: स्थायी रोजगार, पुनर्वास लाभ और मुआवजा राशि प्रदान की गई है। मांग (ख): कुसमुंडा क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने और बाद में एसईसीएल गेवरा में स्थानांतरण कराने वाले एक अन्य व्यक्ति रहीस खान (पिता नूरखां) के खिलाफ 28 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराई गई थी। विस्थापितों ने मांग की है कि इस जांच की वर्तमान स्थिति से उन्हें लिखित रूप में आश्वस्त किया जाए। प्रशासनिक सुरक्षा और अनिश्चितकालीन आंदोलन की रूपरेखा: आवेदन पत्र में प्रभावित परिवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि हक मांगने पर उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में, उन्होंने प्रशासन से शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा मुहैया कराने की भी अपील की है। विस्थापितों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित 15 दिनों की समय-सीमा के भीतर उनके मामलों का संतोषजनक समाधान नहीं निकला, तो वे उग्र रुख अख्तियार करने को मजबूर होंगे। इसके तहत एसईसीएल कुसमुंडा के सभी प्रशासनिक कार्यालयों के गेट बंद कर तालाबंदी की जाएगी, जिससे कोल माइंस का उत्पादन और डिस्पैच कार्य पूरी तरह बाधित हो जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और स्थानीय शासन-प्रशासन की होगी।



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