Madhya Pradesh News बारिश में डूबा सरकारी स्कूल: खेल मैदान बना तालाब, सांप-बिच्छुओं के साये में पढ़ने को मजबूर मासूम
एक शिक्षक के भरोसे चल रही पूरी शिक्षा व्यवस्था, जलभराव और जर्जर भवन से हर दिन हादसे का खतरा
रिपोर्टर नरेंद्र खांडेकर खरगोन मध्य प्रदेश
कसरावद। विकासखंड के ग्राम कोगावां स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की बदहाल स्थिति ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। लगातार हो रही बारिश के बाद विद्यालय परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि स्कूल का खेल मैदान अब खेल मैदान नहीं, बल्कि तालाब में तब्दील हो चुका है। परिसर में जगह-जगह पानी जमा होने से बच्चों को सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के साये में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। विद्यालय में अध्ययनरत मासूम बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। स्कूल परिसर, किचन शेड, प्रवेश मार्ग और खेल मैदान में कई दिनों से पानी भरा हुआ है, जिससे बच्चों और शिक्षकों के सामने हर दिन दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए। खेल मैदान में खेल नहीं, भरा है बरसाती पानी विद्यालय का खेल मैदान पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। जहां बच्चों की किलकारियां और खेल गतिविधियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां अब बरसाती पानी भरा हुआ है। मैदान में जमा पानी के कारण मच्छरों और कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। बच्चों की शारीरिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।
पांच कक्षाएं और सिर्फ एक शिक्षक शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 20 विद्यार्थियों का नामांकन है, लेकिन पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है। एक ही शिक्षक द्वारा सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। जब शिक्षक को विभागीय बैठक, प्रशिक्षण, विधानसभा ड्यूटी या अन्य शासकीय कार्यों में जाना पड़ता है, तब विद्यालय बंद करना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है और शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर हो रही हैं। दूषित पानी से बढ़ा बीमारी का खतरा विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था केवल एक हैंडपंप के माध्यम से है, लेकिन बारिश के कारण हैंडपंप के आसपास भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदा पानी हैंडपंप क्षेत्र तक पहुंच रहा है, जिससे बच्चों को दूषित पानी पीने का खतरा बना हुआ है। आश्चर्यजनक रूप से आज तक यहां न तो सोख्ता गड्ढा बनाया गया और न ही जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था की गई।
जर्जर भवन बना खतरे का कारण विद्यालय भवन की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है। कई कक्षाओं की छत का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है, जबकि बरसात के दौरान छतों से लगातार पानी टपकता रहता है। दीवारों में दरारें और नमी स्पष्ट दिखाई दे रही है। ऐसे हालात में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय की समस्याओं को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ग्रामीणों ने तत्काल जल निकासी, भवन मरम्मत और अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की मांग की है। क्या बोले अधिकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी बी.एस. निगवाल ने बताया कि विद्यालय का निरीक्षण कर समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय भवन की मरम्मत, छत के प्लास्टर और अन्य आवश्यक कार्यों को पंचायत एवं जनपद पंचायत के माध्यम से कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी संबंधित विभागों से समन्वय किया जाएगा। बड़ा सवाल क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा प्रशासन, या फिर मासूम बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का अधिकार समय रहते मिल पाएगा?



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