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Uttar Pradesh News “शिक्षा विभाग की नींद कब खुलेगी?” | बच्चों का भविष्य अंधकार में आखिरकार ऐसा क्यों शासन प्रशासन क्यों सो रहा है

ब्यूरो चीफ सूरज मथुरा उत्तर प्रदेश

“ये तो हद हो गई भाई साहब! घड़ी में 7 बजकर 45 मिनट। बच्चे स्कूल के गेट पर हाजिर। लेकिन स्कूल? बंद। मास्टर जी? पता नहीं।” बच्चे बैग लेकर खड़े, दीवार पर नारा]* ये तस्वीर आगरा के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय की है। दीवार पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है – ‘पर्यावरण से नाता जोड़ो’। लेकिन अफसोस… शिक्षा से नाता रोज टूट रहा है “साढ़े सात बजे से खड़े हैं। रोज लेट होते हैं। पढ़ाई कब होगी? जब बच्चे समय से आ रहे हैं, तो शिक्षक समय से क्यों नहीं आ रहे? 1 घंटा, 2 घंटा… बच्चों का कीमती समय यूं ही बर्बाद। अभिभावक खेत-खलिहान छोड़कर बच्चों को भेजते हैं, और यहां ताला लटका है।

शिक्षा विभाग सो रहा है क्या भाई साहब? अगर ऐसे ही चला तो ‘पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया’ का नारा सिर्फ नारा बनकर रह जाएगा। सरकार करोड़ों रुपए शिक्षा पर खर्च कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि स्कूल में टीचर नहीं, क्लास में पढ़ाई नहीं। हमारी मांग सीधी है – दोषी शिक्षकों पर तुरंत कार्रवाई हो। और बच्चों की पढ़ाई का समय बर्बाद होना बंद हो। वरना इस लापरवाही की सजा कौन भुगतेगा? इन मासूमों का भविष्य!

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