Uttar Pradesh News बिजली चोरी के नाम पर अवैध वसूली का आरोप, पैसे न देने पर झूठी एफआईआर दर्ज कराने और धमकी देने का आरोप, पीड़ित ने लगाई इंसाफ की गुहार

रिपोर्टर मनीष फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
फतेहपुर। जनपद के रानीपुर गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव निवासी राजेश कुमार सविता ने बिजली विभाग के कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि बिजली चोरी के नाम पर उनसे अवैध रूप से धन की मांग की गई और पैसे न देने पर उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करा दी गई। इतना ही नहीं, पीड़ित का यह भी कहना है कि अब उन्हें फोन के माध्यम से लगातार धमकियां दी जा रही हैं। राजेश कुमार सविता के अनुसार उनका विद्युत कनेक्शन संख्या 4677811000 है। उन्होंने बताया कि 16 जून 2026 को बिजली विभाग के दो लाइनमैन, जिनके नाम धीरज और धनंजय बताए जा रहे हैं, उनके घर पहुंचे थे। उस समय उनके घर पर ताला लगा हुआ था और परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। पीड़ित का कहना है कि उस दौरान कर्मचारियों ने घर का निरीक्षण किया और बाद में शाम को उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।
राजेश कुमार के मुताबिक उन्हें फोन करके पावर हाउस बुलाया गया। जब वह पावर हाउस पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने उन पर बिजली चोरी का आरोप लगाया। पीड़ित का आरोप है कि कर्मचारियों ने कहा कि यदि वह 30 हजार रुपये दे देते हैं तो मामला समाप्त कर दिया जाएगा, अन्यथा उनके खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की अवैध धनराशि देने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने कोई बिजली चोरी नहीं की है, इसलिए रिश्वत देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। राजेश कुमार का आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने के बाद विभागीय कर्मचारियों ने उनके खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज करा दिया। राजेश कुमार सविता का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अवैध वसूली का दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने दावा किया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी उन्हें लगातार फोन करके धमकाया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें डराने और दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वह मामले को आगे न बढ़ाएं और शिकायत वापस ले लें।
इस मामले को लेकर पीड़ित ने बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का भी कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता के खिलाफ बिजली चोरी की शिकायत है तो विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन यदि किसी से धन उगाही या दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है तो यह गंभीर मामला है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। राजेश कुमार का कहना है कि वह एक आम नागरिक हैं और कानून का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई वैध साक्ष्य है तो विभाग उसे सार्वजनिक करे, लेकिन बिना किसी ठोस आधार के झूठा मुकदमा दर्ज कराना और फिर धमकियां देना न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें न्यायपालिका और प्रशासन पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा।
वहीं, इस पूरे मामले में बिजली विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और वास्तविक स्थिति क्या है। फिलहाल रानीपुर गांव का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों के बीच इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। एक ओर पीड़ित खुद को निर्दोष बताते हुए न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी कर्मचारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध धन की मांग की और पैसे न मिलने पर झूठी कार्रवाई कराई, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि बिजली चोरी के आरोप सही पाए जाते हैं तो विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन किसी भी स्थिति में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और आम जनता का भरोसा बना रहे। पीड़ित राजेश कुमार सविता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




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