Chhattisgarh News SECL प्रबंधन की बड़ी लापरवाही: कुसमुंडा खदान में लगातार दूसरे दिन भीषण हादसा, डंपर पलटने से 29 वर्षीय सत्यनारायण की दर्दनाक मौत!

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा: एसईसीएल (SECL) कुसमुंडा प्रबंधन की घोर लापरवाही और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखने की कीमत एक बार फिर एक मासूम कर्मचारी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। खदान के भीतर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे अब प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते दिनों ट्रेलर की चपेट में आने से एक ड्राइवर की मौत के बाद, शनिवार देर रात हुए एक और दर्दनाक हादसे ने SECL के सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है। मिट्टी अनलोड करने के दौरान 150 फीट गहरी खाई में गिरा डंपर मिली प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, यह भीषण दुर्घटना शनिवार रात करीब 1:00 बजे कुसमुंडा खदान के खोडरी फेस में हुई। एसईसीएल के विभागीय कर्मचारी, 29 वर्षीय सत्यनारायण, रात की पाली (नाइट शिफ्ट) में अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। वे 60 टन क्षमता वाले भारी-भरकम डंपर से मिट्टी अनलोड (डंप) करने का काम कर रहे थे।

इसी दौरान अनियंत्रित होकर डंपर अचानक पीछे की तरफ फिसल गया। डंपिंग यार्ड में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण डंपर असंतुलित होकर लगभग 150 फीट गहरी खाई में जा गिरा।
मौके पर ही थमी सांसें हादसा इतना खौफनाक था कि डंपर के परखच्चे उड़ गए। चालक सीट पर मौजूद 29 वर्षीय सत्यनारायण वाहन के भीतर ही बुरी तरह दब गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर एम्बुलेंस और रेस्क्यू टीम पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चोटें इतनी अत्यधिक और गंभीर थीं कि सत्यनारायण ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। SECL प्रबंधन की लापरवाही पर उठे 5 बड़े सवाल: इस दर्दनाक हादसे के बाद खदान कर्मियों और स्थानीय यूनियनों में भारी आक्रोश है। सीधे तौर पर SECL प्रबंधन की निम्नलिखित लापरवाहियां सामने आ रही हैं:
मजबूत ‘बर्म’ (सुरक्षा दीवार) का न होना: डंपिंग यार्ड के किनारों पर नियमानुसार मजबूत सुरक्षा दीवार (Berm) होनी चाहिए ताकि वाहन पीछे न फिसले। खोडरी फेस में सुरक्षा दीवार का न होना प्रबंधन की सीधी लापरवाही है। नाइट शिफ्ट में रोशनी का अभाव: रात के समय खदान के भीतर पर्याप्त लाइटिंग (रोशनी) की व्यवस्था नहीं थी, जिससे डंपिंग पॉइंट का सही अंदाजा लगा पाना बेहद मुश्किल था। सुरक्षा अधिकारियों की अनुपस्थिति: इतनी संवेदनशील नाइट शिफ्ट के दौरान मौके पर किसी जिम्मेदार सुरक्षा अधिकारी या गाइड (स्पॉटर) की तैनाती क्यों नहीं थी? लगातार हादसों के बाद भी अनदेखी: जब बीते दिन ही एक ट्रेलर हादसे में मौत हुई थी, तो प्रबंधन ने तुरंत खदान के भीतर सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं कराया? निष्कर्ष: यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी का नतीजा है। फिलहाल इस घटना के बाद खदान के भीतर तनाव का माहौल है। कर्मी प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मृतक के परिवार के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।




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