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Chhattisgarh News बिलासपुर जिले के पचपेड़ी तहसील अंतर्गत छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड (गृह निर्माण मंडल) द्वारा बनाए जा रहे नए तहसील कार्यालय भवन के निर्माण में भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

अभी भवन पूरी तरह बनकर तैयार भी नहीं हुआ है और हैंडओवर से पहले ही इसकी दीवारों में जगह-जगह भारी मात्रा में बड़ी-बड़ी दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं। निर्माणाधीन सरकारी इमारत की यह बदहाली ठेकेदार की घोर अनियमितता और हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की मिलीभगत की ओर साफ इशारा कर रही है। ​गुणवत्ता से खिलवाड़: पहली बारिश से पहले ही दरकने लगीं दीवारें
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि नए तहसील भवन के निर्माण में तय मापदंडों को ताक पर रखकर बेहद घटिया दर्जे की निर्माण सामग्री (रेत, सीमेंट और ईंट) का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंक्रीट के मिक्सचर और दीवारों की तराई (क्योरिंग) में की गई लापरवाही के कारण ही फिनिशिंग के दौरान ही जगह-जगह दरारें उभर आई हैं। जनता का पूछना है कि जो भवन पहली बरसात का पानी भी नहीं देख पाया, वह भविष्य में आने वाले सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारियों और आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कैसे देगा?
​अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी, अनदेखी या शह?

इस पूरे मामले में ठेकेदार के साथ-साथ हाउसिंग बोर्ड के जिम्मेदार इंजीनियर (उपअभियंता) और एसडीओ (अनुविभागीय अधिकारी) की कार्यप्रणाली भी गंभीर सवालों के घेरे में है। निर्माण कार्य की निगरानी करने की जिम्मेदारी जिन तकनीकी अधिकारियों की है, वे साइट से लगातार नदारद रहते हैं। जगह-जगह आई इन गहरी दरारों को देखने के बाद भी न तो इंजीनियर ने काम रुकवाया और न ही एसडीओ ने ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई की। अधिकारियों की यह अनदेखी साफ बयां करती है कि जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं या फिर जानबूझकर

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